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सौर ऊर्जा से रोशन होंगे सरकारी अस्पताल

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सोलर पैनल - फोटो : SELF
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एटा। अब ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों पर चिकित्सकों, मरीजों, तीमारदाराें को बिजली संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। शासन ने अस्पतालों में रेस्को मोड सौर पावर प्लांट लगाने के निर्देश दिए हैं। जिले में सीएचसी जलेसर और जैथरा के लिए सौर ऊर्जा पावर प्लांट पर मोहर लग चुकी है। अगले चरण में जिले के अन्य सरकारी अस्पताल में सौर ऊर्जा से बिजली आपूर्ति के लिए पावर प्लांट लगाए जाएंगे।
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योगी सरकार के ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेश देने के बाद भी 12 से 14 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल अंधेरे में हैं। ऐसे में यूपी नेडा जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी की छतों पर सौर ऊर्जा पावर प्लांट लगाएगा। वहीं मांग के अनुरूप पावर प्लांट लगने पर अस्पतालों में उपकरण भी चल सकेंगे।

सौर ऊर्जा पावर प्लांट रेस्कों मोड से चलेंगे। प्लांट ग्रिड कनक्टेड प्लांट होने से बिजली से जुड़ा रहेगा। विद्युत निगम अपना मीटर लगाएगा और मीटर बताएगा कि कितनी बिजली सबस्टेशन की खर्च हुई और कितनी बिजली सौर ऊर्जा से जनरेट होकर खपत हुई। इसी आधार पर विद्युत निगम के बिल पर अस्पताल प्रशासन भुगतान करेगा।
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चंद्रशेखर सिंह, नेडा परियोजना अधिकारी

अस्पतालों में 10 केवी से ज्यादा नहीं कनेक्शन
सरकारी अस्पतालों में यूं तो मांग के अनुरूप सौर ऊर्जा पावर प्लांट लगाए जाएंगे। हालांकि दस किलावोट से अधिक नहीं होगा। कम से कम पांच केवी का प्लंाट लग सकता है। अस्पतालों की छत पर लगने वाले सोलर पावर प्लांट का 80 हजार रुपये प्रति किलोवाट खर्च आएगा। 10 केवी का पैनल लगने पर अस्पताल को दस लाख खर्च करने होंगे।
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