मथुरा। कलक्ट्रेट परिसर का 156 साल पुराना भवन कभी भी बडे़ हादसे का कारण बन सकता है। इस भवन को निष्प्रयोजी घोषित करने के बाद अफसरों के कार्यालयों का स्थान तो बदल गया, लेकिन कर्मचारी आज भी इस छत के नीचे ही काम कर रहे हैं।
सिविल लाइन में कलक्ट्रेट परिसर का निर्माण ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1861 में किया गया था। करीब आठ-10 साल पहले इस भवन को निष्प्रयोजी घोषित कर दिया गया। पीडब्लूडी की रिपोर्ट में इस भवन की छत को बेहद कमजोर माना गया। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रशासनिक अफसरों के लिए नया भवन तैयार कर दिया गया। इसमें डीएम और एडीएम के कार्यालय स्थापित कर दिए गए, लेकिन पुराने निष्प्रयोजी भवन में रिकार्ड रूम के अलावा शिकायत पटल, निकाय पटल, लाइसेंस पटल, चकबंदी कोर्ट, औषधि विभाग सहित कई कार्यालय मौजूद हैं। इसके अलावा वादकारियों की भी मौजूदगी रहती है।
इस भवन की मरम्मत के लिए तीन बार शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ है। करीब तीन साल पहले 2.73 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था, जो फिर शासन में दब गया। इसके अलावा कलक्ट्रेट परिसर में ही मनोरंजन कार्यालय की ओर बना भवन भी जर्जर अवस्था में है। इसकी मरम्मत के लिए भी कई बार शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन इसकी स्वीकृति भी शासन से कभी नहीं हो सकी। जर्जर भवनों की छत के नीचे बैठकर काम कर रहे कर्मचारी हमेशा अनहोनी को लेकर चिंतित रहते हैं।