सोरों। भारत सरकार के गंगा स्वच्छता अभियान को तीर्थनगरी में पलीता लग रहा है। हरिपदी में पानी की आपूर्ति करने वाले बंबे में दूषित पानी गिर रहा है।
देश के कोने कोने से अगाध श्रद्धा के साथ हरि की पैड़ी में गंगा स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है। हरि की पैड़ी में गंगा जल की आपूर्ति गोरहा माइनर से की जाती है। गोरहा माइनर से तीर्थ नगरी तक 7 किलोमीटर लंबा बंबा है, जो हरि की पैड़ी तक जल आपूर्ति का साधन है।
गोरहा से सोरों तक होडलपुर, प्रहलादपुर, नगला खंजी आदि गांव पड़ते हैं। ग्रामीण अपने घरों के दूषित पानी गंदा पानी को बंबे में गिराते हैं। होडलपुर में तो दो जगह गंदा पानी बंबे में जा रहा है, जो गोरहा माइनर से आने वाले जल में मिलकर सीधा हरि की पैड़ी में पहुंच रहा है। यही हाल नगला खंजी, प्रहलादपुर का भी है।
हरि की पैड़ी में प्रतिदिन राजस्थान, एमपी, गुजरात, महाराष्ट्र के अलावा दूर दूर के प्रांतों से प्रतिदिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में आकर स्नान, आचमन व अन्य पूजन कार्यों के लिए गंगाजल पात्रों में भरकर ले जाते हैं। जल प्रदूषण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तीर्थनगरी के बाशिंदे लंबे समय से गोरहा माइनर से हरि की पैड़ी तक पाइप लाइन डाले जाने की मांग कर रहे हैं।
सोरों निवासी श्रीकांत तिवारी ने कहा कि निचली गंगा नहर से बूढ़ी गंगा में जल प्रवाह किया जाए। बूढ़ी गंगा हरि की पैड़ी को जोड़कर बहती धारा का सपना साकार किया जा सकता है। सोरों निवासी रामेश्वर दयाल महेरे ने कहा कि गोरहा माइनर में जल की आपूर्ति निरंतर नहीं होती है। श्रद्धालुओं की आवक को देखते हुए हरि की पैड़ी में निरंतर जलप्रवाह की आवश्यकता है। अविरल निर्मल धारा के लिए प्रबंध करना जरूरी हैं। सोरों निवासी डा. राधाकृष्ण दीक्षित ने कहा कि निरंतर चलने वाली निचली गंगा नहर हजारा से हरि की पैड़ी तक पाइप लाइन डाली जाए। जिससे हरि की पैड़ी में निरंतर शुद्ध जल मिलता रहे।
दूषित पानी की निकासी के लिए पाइप डलवाई जाएगी। मिट्टी डलवाकर गंदे पानी का बहाव बंबे की ओर से हटाया जाएगा। क्षतिग्रस्त हो रहे बंबे की मरम्मत कराई जाएगी।
अर्चना पप्पू यादव, पालिकाध्यक्ष, सोरों