वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर श्रीबांकेेबिहारीजी के प्राकट्य महोत्सव पर पहली बार संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदासजी महाराज चांदी से बने रथ में विराजमान हो ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को प्राकट्य महोत्सव की बधाई देने निकलेंगे। स्वामी हरिदासजी का दिव्य रथ बनकर तैयार है। इधर ठाकुर बांकेबिहारी की प्राकट्यस्थली निधिवनराज में इस दिव्य आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के सेवायत और महोत्सव के आयोजक भीकचंद गोस्वामी और रोहित गोस्वामी ने बताया कि 12 नवंबर को ठाकुर श्री बांकेे बिहारी के प्राकट्यस्थल निधिवनराज में सबह 5 बजे अभिषेक, 7:00 बजे बधाई गायन एवं 8:15 बजे स्वामी श्रीहरिदास महाराज की आरती होगी।
इसके बाद 8:30 बजे से श्रीनिधिवन राजमंदिर से बधाई शोभायात्रा निकाली जाएगी जो नगर केे विभिन्न मार्गों से होकर बांकेेबिहारी मंदिर पहुंचेगी। बताया कि पहली बार स्वामी हरिदासजी चांदी के रथ में विराजमान होकर जन जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को बधाई देने जाएंगे। कहा कि चांदी से बने इस रथ का निर्माण बनारस के कारीगरों ने किया है।
शोभायात्रा के आगे बनेंगी रंगोली
वृंदावन। चांदी के रथ में विराजमान होकर अपने लाडले ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को स्वामी हरिदास के रथ के आगे रंगोली बनाईं जाएंगी। इन रंगोली को पंजाब के लुधियाना के 8 कलाकार बुलाए गए हैं। जो कुछ ही मिनटों में रथ के मार्ग पर आगे रंगोली बनाएंगे। वहीं निधिवन राज में आतिशबाजी भी होगी।
निधिवन राज को दिया गया प्राचीन स्वरूप
वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की प्राकट्य और स्वामी हरिदासजी महाराज की साधना स्थली को प्राचीन स्वरूप दिया गया है। स्वामी हरिदासजी की साधना स्थली निधिवन राज में ब्रजरज डलवाई गई है। साथ ही बांस की टटिया लगाई गईं हैं। जहां स्वामी की निज साधना स्थली को गोबर और ब्रजरज का लेपन किया गया है। इससे यह स्थान वहीं प्राचीन कुटिया दिखाई दे।