एटा। विकास खंड सकीट में हुए मनरेगा में करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच में देरी से कार्रवाई अटक गई है। सत्ताधारी दल के नेता अधिकारियों पर जांच दबाने को दबाव बना रहे हैं। अब जिम्मेदार मनरेगा कार्यों का सत्यापन करने से कतरा रहे हैं।
वर्ष 2016-17 और 2017-18 में सकीट ब्लॉक में मनरेगा के तहत 73 कार्य किए। इनमें से आधे ऐसे कार्यों को ब्लॉक के दिखाकर भुगतान कर दिया, जिन्हें जिला पंचायत ने कराया था। कई कार्य मजदूरों के बजाए मशीन से कराकर भुगतान कर दिया। नगर काजी निवासी विनोद कुमार यादव की शिकायत पर डीडीओ जांच की तो करोड़ों रुपये का घोटाले का खुलासा हुआ। सीडीओ उग्रसेन पांडेय ने टीमें गठन कर सभी 73 कार्यों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए, जो अभी तक अपनी जांच रिपोर्ट नहीं सौप पाए हैं।
जांच अधिकारियों को धमका रहे नेता
जब ब्लॉक में सत्यापन को जांच अधिकारियों की टीम पहुंची, तो सत्ताधारी दल के दो जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को फोन पर हड़काया। जांच प्रभावित करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि दोनों जनप्रतिनिधियों ने साफ कह दिया है कि मामला जहां के तहा दबा दिया जाए। पूर्व सरकार के एक जनप्रतिनिधि का भी नाम घोटाले में आ रहा है। इसके बचाव में सत्ताधारी दल के नेता अधिकारियों को फोन कर रहे हैं।
ये अधिकारी कर रहे जांच
समाज कल्याण अधिकारी एसपी सिंह, सहायक अभियंता डीआरडीए वीके गोयल, भूमि संरक्षण अधिकारी एसपी सारस्वत, भूमि संरक्षण अधिकारी ऊसर सुधार रूपचंद्र गौतम, डीएसटीओ रमेश चंद्र, एईआरईडी अरविंद शर्मा, एई लघुसिंचाई मनोज अग्रवाल अधिकारी मनरेगा घोटाले की जांच कर रहे हैं।
सत्यापन में जुटी टीमों को ब्लॉक से अभिलेख नहीं मिले हैं। इस वजह से जांच में देरी हो रही है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ हर हाल में कार्रवाई होगी। कोई भी अधिकारी किसी का दबाव नहीं मान रहा। सभी स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर रहे हैं।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ।