बरसाना (मथुरा)। श्री राधाजी की अष्ट सखियों में से एक तुंग विद्या सखी श्रीजी को अत्यंत प्रिय थीं। वीणा बजाने में महारथी तुंग विद्या की कला ऐसी थी कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी उनकी धुन को सुनते ही झूम उठते। वहीं राधा की सखी रंगदेवी हमेशा ही श्रीकृष्ण-राधा की चंवर सेवा में लगी रहतीं।
बरसाना से दक्षिण दिशा में छह किलोमीटर दूर सखी तुंग विद्या का गांव डभाला है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर में तुंगविद्या सखी पीले रंग के परिधान धारण कर भक्तों को दर्शन दे रही हैं। इनका जन्म भाद्रपद शुक्लपक्ष पंचमी को हुआ था। वहीं बरसाना से आठ किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित राकोंली अष्टसखियों में से एक रंगदेवी सखी का गांव है।
श्री राधारानी एवं भगवान श्रीकृष्ण की चंवर सेवा करना इन्हें अत्यंत प्रिय था। इनका जन्म भाद्रपद शुक्लपक्ष त्रयोदशी को बताया जाता है। इन सखियों की जानकारी श्रीलनारायण भट्ट कृत ब्रजोत्सव चंद्रिका के अंतर्गत विविध शास्त्रीय प्रमाणों पर आधारित है।
राधा से पांच दिन छोटी हैं रंगदेवी, तीन दिन बढ़ी है तुंग विद्या
रंगदेवी सखी राधारानी से पांच दिन छोटी हैं। इनके पिता का नाम वीरभानु एवं माता का नाम सूर्यवती है, जबकि तुंगविद्या सखी राधारानी से तीन दिन बड़ी बताई जाती हैं। इनके पिता का नाम अंगद एवं माता का नाम ब्रह्मकर्णी था।