एटा। आयकर विभाग ने जिले के 350 ऐसे बैंक खाता धारकों को नोटिस भेज कर आय का स्रोत पूछा जिन्होंने नोटबंदी के दौरान खाते में दो लाख रुपये से अधिक रकम जमा कराई है। यदि खाता धारक ने आयकर रिटर्न भरकर आय का स्रोत बताया तो कोई टैक्स नहीं लगेगा। यदि गलती से रिर्टन नहीं भरा और आय का स्रोत भी नहीं बताया तो 45 प्रतिशत आयकर भरना पड़ेगा।
नोटिस मिलने के बाद खाता धारकों में हड़कंप मच गया है। लोग सीए और सीएस के अलावा आयकर विभाग में सलाह लेने पहुंच रहे हैं। केंद्र सरकार ने कालेधन पर लगाम लगाने के लिए विगत वर्ष नवंबर में 500 और 1000 के नोट के चलन पर पाबंदी लगाई थी। इसके अब आयकर विभाग ने जिले के व्यापारियों, किसानों, उद्यमियों और आम खाता धारकों समेत 350 खाता धारकों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में विभाग ने पूंछा है कि नोट बंदी के दौरान आपके खाते में अचानक जमा हुई लाखों रुपये रकम का स्रोत क्या है।
विभाग ने यह भी पूछा है कि इससे पहले खाते में इतने रुपये कभी जमा नहीं हुए, लेकिन नोटबंदी में ही धन क्यों और किस स्रोत से जमा कराया गया। आयकर अधिकारियों बताया जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं यदि उन लोगों ने आयकर रिटर्न भरते हुए जमा धन का स्रोत घोषित किया तो उन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यदि गलती से रिटर्न भी नहीं भरते हुए नोटबंदी के दौरान खाते में जमा कराई गई रकम का स्रोत भी नहीं बताया है तो उन पर 45 प्रतिशत टैक्स लगेगा। नोटिस मिलने के बाद बाद खाता धारकों में हड़कंप मच गया है। अब लोग चार्टर्ड आकाउंटें, कंपनी सेक्रेटरी वकीलों से सलाह ले रहे हैं।
आसान नहीं कालाधन कृषि आय में दिखाना
जो लोग मंडी और आढ़ती पर दलाली कर कालाधन कमाने के बाद उसे कृषि आय में दिखा कर टैक्स देने से बच रहे हैं। अब उनके लिए कालेधन को कृषि आय के रास्ते छिपाना आसान नहीं होगा। चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रतीक आमौरिया ने खाते पांच लाख रुपये जमा कर कृषि आय दिखाने पर किसान को खसरा खतौनी और फसल का ब्यौरा दिखाने के साथ मंडी की रसीद भी दिखानी होगी। तभी किसानों को कृषि आय में टैक्स की छूट मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि खसरा और खतौनी मे दर्ज फसल में अंतर मिला को किसान को टैक्स देना होगा।