एटा। थोड़ा दर्द हुआ पैरासीटामोल ले ली, छींक आई तो जुकाम समझ बाम लगा लिया। बेचैनी हुई तो गोली खा ली। चक्कर आया और दवा पी ली। अगर आप सोच रहे हैं कि अपनी सेहत के डाक्टर खुद बनकर आप ठीक हो जाएंगे, तो दिमाग से निकाल दें। जी हां बिना डाक्टरी सलाह के दवा खाना सेहत के लिए नुकसान देह साबित हो सकता है। नशे के लिए शेड्यूल एन वन दवाओं की बिक्री खुलेआम हो रही है। आलम यह है कि इन दवाओं के कोड वर्ड तक तय कर दिए हैं।
लोगों को स्व चिकित्सा एक आसान, सस्ता और कम समय में होने वाला उपाय लगता है। लेकिन कम समय में मिलने वाली राहत जल्द ही स्थायी आदत में तब्दील हो जाती है और शरीर कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है। जिले में इन दवाओं की आड़ में नशे का धंधा हो रहा हैै। कोरेक्स और एलप्रेक्स जैसी दवाएं दुकानदार बिना चिकित्सक के पर्चे के बेच रहे हैं।
यही नहीं इन दवाओं का बिल नहीं दिया जाता। सरकार ने इस श्रेणी में दवाओं के 46 मॉलिक्यूल शामिल किए। इन्हें बेचने से पहले मेडिकल स्टोर संचालक को पूरा रिकार्ड रखना पड़ता है, लेकिन जिले में मेडिक ल स्टोरों पर ऐसा नहीं है। मेडिकल स्टोर पर ग्राहक के साथ-साथ इन दवाओं का कोड भी फिक्स है। कोडवर्ड बोलते ही दुकानदार दवाएं बिना पर्चे के उपलब्ध कराते हैं। गली-मुहल्लों में संचालित कई मेडिकल स्टोर तो ऐसी ही दवाओं के बेचने का काम कर रहे हैं।
कोडवर्ड में कोरेक्स को छुआरे का रस, बेनाड्रिल बादाम का तेल, एलप्रैक्स किशमिश जैसे नामों से जानी जाती हैं।
ये हैं प्रमुख दवाएं
कोरेक्स, बेनाड्रिल, एविल, प्रोक्सी वन, ड्यूप्रिन आरविन, एलप्राजोलम, डायजापॉम, फोर्टविन, एलप्रैक्स0.5, आक्सीटोसिन, कोडीन, नेर्टावैक्स।
जनरल स्टोर भी पीछे नहीं
नशे का सामान बेचने में जनरल स्टोर भी पीछे नहीं है। इन स्टोरों पर व्हाइटनर खूब बिकती है। नेल पालिश लगाने में काम आने वाले थिनर की शीशियां बिकती हैं। दरअसल, इनसे निकलने वाली खुशबू का इस्तेमाल नशेबाज करते हैं।
इनका कहना है
जिले में शेड्यूल एच वन दवाएं बिना डाक्टरी सलाह के बेची नहीं जा सकती। इसके लिए रजिस्टर मेनटेन करना होता है। अगर जिले में ऐसा हो रहा है, तो छापेमारी कर मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राम पुकार पांडेय, सहायक आयुक्त औषधि, अलीगढ़
टालमोल या अन्य किसी दवा को बिना डाक्टरी सलाह के लेना गलत है। एक व्यक्ति को दिन में अधिक से अधिक 3 ग्राम पैरासीटामोल आवश्यक होता है। वहीं यह दवाएं अगर बिना डाक्टरी सलाह के सेवन की जाती हैं, तो यह व्यक्ति को आदी बना देती हैं। जिसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
डा. एस चंद्रा, फिजीशियन, जिला अस्पताल