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Agra News: दयालबाग में 31 एमएलडी का एसटीपी तैयार, ट्रायल शुरू

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आगरा। यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए चल रही कोशिशों के बीच जल निगम ने दयालबाग क्षेत्र में करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से 31 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार कर दिया है। शुक्रवार से इसका ट्रायल भी शुरू हो गया। अगले तीन महीने तक ट्रायल रन के बाद निगम इस प्लांट का आधिकारिक रूप से संचालन शुरू कर देगा।
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प्लांट के शुरू होने के बाद बूढ़ी का नगला समेत कई छोटे नालों का गंदा पानी शोधित होने के बाद ही यमुना में जाएगा। करीब छह साल पहले बूढ़ी का नगला समेत पचास नालों को नगर निगम ने टैप करने की कवायद शुरू की थी। लक्ष्य रखा गया कि नालों से गंदा पानी यमुना में न गिरने दिया जाए। यहां पर एक 2.25 एमएलडी का एसटीपी बनाया गया। कुछ समय बाद आने वाले पानी की अपेक्षा एसटीपी छोटा पड़ने लगा।



वहीं, टैप होने के बावजूद ओवरफ्लो होकर गंदा पानी यमुना में जा रहा था। इसी के बाद नगर निगम ने जल निगम की मदद से नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत विश्व बैंक पोषित 582 करोड़ रुपये की लागत से करीब 177 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण शुरू किया। दयालबाग में बन रहे 31 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण दो दिन पहले पूरा हो गया। जल निगम के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जनवरी 2026 तक इसका ट्रायल रन किया जाएगा। इस दाैरान शोधित होने वाले पानी के सैंपल लेकर लगातार टेस्टिंग की जाएगी। परिणामों के आधार पर इसे आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा।
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2027 में शुरू होगा 100 एमएलडी का प्लांट



जनवरी 2026 में दयालबाग स्थित प्लांट के शुरू होने के बाद धांधूपुरा में बन रहा 100 एमएलडी का प्लांट जनवरी 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा छोटे नालों पर बन रहे कुल 11.6 एमएलडी क्षमता के प्लांट भी 2026 में शुरू होने की संभावना है। इन सभी के बनने के बाद पहले से टैप नालों के अलावा इस साल टैप किए जाने वाले भैरोघाट, वाॅटर वर्क्स, नरायच, एत्माद्दाैला और नुनिहाई नालों का पानी डायवर्ट कर शोधित करने के बाद ही यमुना में छोड़ा जाएगा।
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