आगरा में बिजली विभाग में बड़ा टेंडर घोटाला हुआ। इसकी जांच भी लापरवाही के चलते अटकी हुई है। पुलिस को अब तक प्राथमिकी से संबंधित आवश्यक प्रपत्र बिजली विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
फतेहाबाद विद्युत वितरण मंडल में 30 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर घोटाले की जांच विभागीय लापरवाही के चलते अटकी हुई है। मामले में पुलिस को अब तक प्राथमिकी से संबंधित आवश्यक प्रपत्र बिजली विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इस कारण विवेचना शुरू नहीं हो सकी है।
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जानकारी के अनुसार, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, फतेहाबाद मंडल में वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच हुए टेंडर घोटाले में शिविर सहायक (बाबू) नीरज पाठक को मुख्य आरोपी बनाया गया है। नीरज पाठक अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में पहले कमरे में बैठकर कार्य करते थे। विभागीय अधिकारियों ने उनके कमरे को सील कर दिया है, ताकि वहां रखे महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रह सकें।
बताया गया है कि यह सील विवेचना अधिकारी की मौजूदगी में खोली जाएगी। इस मामले में एसई फतेहाबाद सोमवीर की तहरीर पर वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान तैनात रहे अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार, अरविंद कुमार, रविकांत मिश्रा और डीएन प्रसाद के साथ तत्कालीन लेखाकार सतीश कुमार और 13 फर्म मालिकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बिजली विभाग ने 6 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस को प्राथमिकी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। एसीपी फतेहाबाद अनिल कुमार ने बताया कि बिजली विभाग की ओर से अब तक प्राथमिकी से संबंधित प्रपत्र नहीं मिले हैं। इस वजह से जांच आगे नहीं बढ़ पाई है।
जल्द करा देंगे उपलब्ध
एसई फतेहाबाद सोमवीर सिंह ने बताया कि प्राथमिकी से संबंधित जो प्रपत्र शेष रह गए हैं, उन्हें पुलिस को एक-दो दिन में उपलब्ध करा दिया जाएगा।