आगरा में पिछले साल चिह्नित 498 जर्जर परिषदीय स्कूल भवनों में करीब 200 पर ही कार्रवाई हो सकी, जबकि 298 भवन अब भी खतरे में हैं। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए नए जर्जर भवनों का निरीक्षण शुरू हो गया है, लेकिन पुराने भवनों पर कार्रवाई की धीमी रफ्तार चिंता बढ़ा रही है।
परिषदीय विद्यालयों को सुरक्षित बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें सुरक्षा ऑडिट और जोखिम आकलन की व्यवस्था है, इसके बावजूद जिले में पिछले साल चिह्नित जर्जर स्कूल भवनों पर कार्रवाई की रफ्तार सुस्त है। चिह्नित 498 जर्जर भवन में करीब 200 ही ध्वस्त हुए। शेष 298 भवन अब भी कार्रवाई के इंतजार में हैं। अब तो शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए नए जर्जर भवनों का निरीक्षण भी शुरू हो चुका है।
विज्ञापन
हर साल परिषदीय विद्यालयों के भवनों की स्थिति का निरीक्षण कर जर्जर भवनों को चिह्नित किया जाता है। इसके बाद तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर भवन के ध्वस्तीकरण, मरम्मत या पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तय होती है। इस साल भी विभागीय टीमें विद्यालयों में पहुंचकर भवनों की स्थिति देख रही हैं, नए जर्जर भवनों की सूची बनाई जा रही है। मगर पिछले साल चिह्नित 498 भवनों में से 298 पर अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है। बारिश के दौरान कमजोर भवनों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जर्जर भवनों का समय पर निरीक्षण और कार्रवाई जरूरी है।
मरम्मत के लिए अलग बजट नहीं
पहले सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रधानाध्यापक स्कूल में मरम्मत की जरूरत होने पर खंड शिक्षा अधिकारी को जानकारी देते थे और इसके बाद बीएसए स्तर से धनराशि उपलब्ध कराई जाती थी। अब पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से विद्यालयों को अलग-अलग मदों में धनराशि मिलती है। रंगाई-पुताई और अन्य रखरखाव के लिए बजट है लेकिन भवन की बड़ी मरम्मत के लिए अलग से बजट नहीं मिलता। - बृजेश दीक्षित, जिलामंत्री, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ
जल्द मूल्यांकन का करेंगे प्रयास
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से जल्द से जल्द अब इन जर्जर स्कूलों का मूल्यांकन कराने का प्रयास करेंगे जिससे आगे की विधिवत कार्रवाई हो सके।