मथुरा में 15 मई को सराफ विकास गोयल और मेघ अग्रवाल की हत्या को यूपी पुलिस ने चुनौती के रूप में लिया। सूबे में डीजीपी का पद संभालने वाले सुलखान सिंह के लिए भी यह पहली बड़ी वारदात थी जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया। विधानसभा में हंगामा हो रहा था और पुलिस की नाक पर बात बन आई।
ऐसे में इस हत्याकांड के खुलासे के लिए स्थानीय पुलिस से लेकर स्पेशल टास्क फोर्स को भी लगाया गया। डीजीपी से लेकर सीओ स्तर तक 20 अफसर इस घटना की परतें खोलने में जुटे थे। यूपी पुलिस की 27 टीम एक-एक कड़ी जोड़कर ब्लू प्रिंट तैयार कर रहीं थीं। बताया गया है कि पुलिस टीम ने 70 स्थानों पर दबिश दीं। मथुरा के चौबियापाड़ा में तो एक दिन में तीन तीन दबिश पड़ रही थीं।
डीजीपी सुलखान सिंह 17 मई को पूरे दिन मथुरा में डेरा डाले रहे। 18 मई को आगरा में भी इस घटना की समीक्षा की। यह वारदात विधानसभा तक में गूंजी लिहाजा खुलासे के लिए पूरी ताकत लगा दी गई है।
उत्तर प्रदेश में अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और हरियाणा में होडल और मेवात के इलाके में छापे मारे गए। राजस्थान के डीग में भी पुलिस पहुंची। एसटीएफ की तो पूरी ताकत इस घटना के खुलासे में लगा दी गई।