स्पेशल डीजीसी पॉक्सो कोर्ट अलका उपमन्यु
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा में 26 दिन, 10 गवाह, खुद जुर्म ए इकबाल और सीसीटीवी फुटेज दोषी के खिलाफ सुबूत फांसी की सजा का कारण बने। दस वर्षीय मासूम की हत्या मेें इन सबके आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विपिन कुमार द्वारा युवक को फांसी की सजा सुनाई गई। बालिका के माता-पिता ने कहा कि उन्हें इतनी जल्दी न्याय की उम्मीद नहीं थी। मेरी बेटी के हत्यारे को जल्दी फांसी पर लटकाया जाए।
जानकारी रहे दोषी सतीश, बालिका का पड़ोसी था। वह बालिका को भंडारे में खाना खिलवाने के बहाने अपने साथ ले गया। इसकी जानकारी जांच अधिकारी जैंत थाना इंचार्ज अरुण को उस समय लगी जब उनके द्वारा बालिका के घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। इन सीसीटीवी फुटेज मेें वह बालिका को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया। यह सीसीटीवी फुटेज अदालत मेें पेश किए। इस पर सतीश ने अदालत के समक्ष अपना जुर्म भी इकबाल कर लिया।
वादी के अधिवक्ता वीरेंद्र लवानिया ने बताया कि अदालत में उन्होंने कुल 10 गवाह पेश किए। इनमें कुछ गवाह पड़ोसी थे जिन्होंने सीसीटीवी फुटेज में सतीश की पहचान की। बताया कि जब सारी बातें घर पर बताने के लिए कहा तो उसने लात मार कर बालिका की हत्या कर दी। वहीं अभियुक्त के अधिवक्ता योगेश कुमार तिवारी ने बताया कि यह फैसला अभियुक्त के हत्या का जुर्म कबूल किए जाने के बाद न्यायालय ने दिया। वह इसमें अग्रिम कार्रवाई जो भी होगी वह करेंगे। अभियुक्त के पिता अंधे हैं। सजा सुनाए जाने के दौरान अभियुक्त सतीश स्तब्ध रह गया और कुछ नहीं बोला।
फाइल हाईकोर्ट भेजी जाएगी
अभियुक्त सतीश की फांसी की सजा के निर्णय की फाइल अदालत द्वारा विशेष संदेश वाहक द्वारा हाईकोर्ट भेजी जाएगी। अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि सतीश को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। साथ ही लिखा है कि यह दंडादेश उस समय तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा इसकी पुष्टि न की जाए।
बालिका के अंदरूनी अंगों पर थी चोट
जांच में पाया गया था कि बालिका के बाहरी हिस्से पर चोट के कोई निशान नहीं थे परंतु बालिका को लात मारकर मारा गया था। बालिका के अंदरूनी अंग तक फट गए थे। बालिका का गुर्दा-लिवर फट गया था।
अर्थदंड की धनराशि परिजन को दी जाए
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अलका उपमन्यु ने बताया कि अदालत द्वारा लगाए गए 45 हजार रुपये के अर्थदंड की 80 प्रतिशत धनराशि पीड़िता के परिजन को देय होगी।