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अव्यवस्थाओं के बीच रवाना हुई पोलिंग पार्टियां

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अव्यवस्थाओं के बीच रवाना हुई पोलिंग पार्टियां - फोटो : अमर उजाला
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एटा। लोकसभा चुनाव के मतदान के लिए गुरुवार को भले ही द्वितीय चरण हो लेकिन जिला प्रशासन के लिए यह चुनौतियों का पहला चरण है। इस पहले चरण में जिला प्रशासन के इंतजामों की पोल खुल गई। पोलिंग पार्टियों को मतदान केंद्रों तक भेजने के लिए प्रशासन पर्याप्त वाहनों की व्यवस्था भी नहीं कर सका। इसके चलते पोलिंग पार्टियों के सदस्यों को धूप में घंटों इंतजार करना पड़ा। वहीं सीपीएमएफ के जवानों को तो बस में बैठने के बाद उतार दिया गया और अपनी बसों से पोलिंग बूथ तक जाने को कहा गया। बुधवार को पोलिंग पार्टियों की मतदान केंद्रों के लिए रवानगी के दौरान इस तरह की कई अव्यवस्थाएं हावी रहीं।
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कैसे रखें वीवीपैट को सीधा
मतदान कार्मिकों को प्रशिक्षण के दौरान बताया गया था कि वीवीपैट मशीन को सीधा रखना है लेकिन बसों में जगह न होने के कारण मतदान कार्मिक परेशान रहे कि वह मशीन को सीधा रखकर कैसे ले जाएं। इसके चलते उन्होंने मंडी में मौजूद अधिकारियों से कई बार अपनी पीढ़ा भी बताई। इस पर अधिकारियों का जवाब था कि जो व्यवस्था है उसी में मैनेज करिए।
यह कैसी व्यवस्था, अब बस में बैठे कहां
मतदान कार्मिक मंडी में ड्यूटी लेकर जब अपनी-अपनी बसों पर पहुंचे तो उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। बड़ी बसों में तो 40-45 लोग बैठ जा रहे थे लेकिन छोटी बसों में 30 लोगों के बैठने की जगह थी जबकि इन बसों में पांच पोलिंग पार्टियों को जाने के लिए पर्ची दे दी गई थी। ऐसे में एक पोलिंग पार्टी में 9 के हिसाब से 45 लोग हो रहे थे। जो छोटी बस में नहीं आ पा रहे थे। ऐसे में करीब 12 से 15 मतदान कर्मी बस के बाहर खड़े रहे गए। उन्होंने आपत्ति जताई तो एआरटीओ और डीएसओ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दूसरी बस की व्यवस्था कराई तब जाकर समस्या हल हो सकी।
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सीपीएमएफ के जवानों को बस से उतारा
जब बसों में जगह नहीं रही तो व्यवस्था देख रहे अधिकारियों ने बस में बैठे सीपीएमएफ के जवानों को उतार दिया। उनसे कहा गया कि आप लोग जिन बसों से यहां तक आए हैं उन्हीं बसों से पोलिंग बूथ तक जाएं। इस पर जवानों ने कहा कि उन्हें इसी बस की पर्ची मिली है तो उनसे अपने अधिकारियों से बात करने को कहा गया। इसी तरह पंजाब पुलिस के जवान भी पोलिंग बूथों तक जाने के लिए परेशान रहे। उनसे भी अपनी बसों से जाने को कह दिया गया।
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