बाढ़ से बर्बाद हुईं फसल, किसान परेशान
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कासगंज। जिले में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। गंगा के जलस्तर में मंगलवार को और 5 सेंटीमीटर की वृद्धि हो गई। पिछले 48 घंटों से लगातार 2 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बना हुआ है। जिससे न केवल बाढ़ का दायरा बढ़ा है बल्कि गांव में घुसे पानी का जलस्तर भी बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों की सड़कों के ऊपर से बाढ़ का पानी गुजर रहा है।
मंगलवार को गंगा का जलस्तर 5 सेंटीमीटर और बढ़कर 163.75 मीटर के निशान पर पहुंच गया। इस साल का यह अधिकतम जलस्तर है। नरौरा के अलावा बिजनौर और हरिद्वार बैराज पर भी पानी का दवाब लगातार बना हुआ है। बाढ़ का कहर बढ़ने से ग्रामीण बेहद परेशान हैं। सबसे ज्यादा क्षति फसलों को हुई है। फसलों में हजारों बीघा मक्का बाजरा की फसलें सड़कर नष्ट हो गईं। अब ईख की फसल को भी नुकसान होने लगा है। हालांकि ईख की फसल को बाढ़ का पानी फायदा पहुंचाता है, लेकिन जिले में बाढ़ का प्रभाव 1 महीने से अधिक समय तक हो जाने के कारण अब यह पानी ईख की फसल के लिए भी नुकसान दे रहा है। प्रभावित इलाकों में किसानों का मुख्य उत्पादन ईख का है। ईख की फसल बर्बाद होने से किसानों को सर्वाधिक क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है। किसान बाढ़ से हो रही तबाही को लेकर बेहद परेशान नजर आ रहे हैं।
वहीं विभिन्न मार्गों के कटे होने के कारण किसान अपने अपने गांव में सिमटकर रह गए हैं। बाढ़ के पानी को ग्रामीण तैर कर पार कर रहे हैं या फिर नाव के सहारे। पशुओं के चारे की किल्लत भी चरम पर है। पिछले 5 दिनों से लगातार पानी में वृद्धि होने के कारण जो घास के मैदान सुखे थे उनमें भी पानी भर चुका है। गांव में बनी भूसे की बुर्जियां भी बाढ़ की चपेट में आ गईं हैं और उनका भूसा भी सड़ गया है। लोग जहां तहां सुरक्षित डेरे बनाकर रह रहे हैं। प्रशासन भी लगातार निगरानी करके ग्रामीणों को मदद दे रहा है, लेकिन इससे ग्रामीणों को राहत नहीं मिल पा रही।
डिस्चार्ज-
नरौरा- 199318 क्यूसेक
बिजनौर- 146295 क्यूसेक
हरिद्वार- 100411 क्यूसेक
कछला गेज- 163.75 मीटर के निशान पर।
- गंगा के जलस्तर में मंगलवार को वृद्धि हुई है। इस साल का यह सर्वाधिक जलस्तर है। अभी स्थिति जस के तस रहने का अनुमान है, इसके बाद गिरावट आएगी। यदि हरिद्वार से पानी का डिस्चार्ज नहीं बढ़ा तो स्थिति में और सुधार होगा।
- एके सिंह, सहायक बाढ़ प्रभारी।