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कर्ज देने वाले कर रहे थे परेशान, त्रस्त था परिवार

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फिरोजाबाद। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पवन उर्फ बंटी बेलदारी करके प्रति दिन तीन सौ रुपये कमाता था। उसने तीन ऐसी प्राइवेट चिटफंड कंपनियों से कर्जा ले रखा था जो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। जिन कंपनियों से पवन ने कर्ज लिया था उनके लोग उस पर काफी दबाव बना रहे थे। घर पर आकर हंगामा करते थे। कम रुपये देने पर झगड़ा करते और रुपये फेंक देते थे। इस माहौल से पवन की पत्नी काफी परेशान थी। कर्ज चुकाने एवं परिवार का खर्चा चलाने के लिए पवन 280 रुपये पत्नी अनीता को देता था। वह मात्र बीस रुपये ही अपने पास रखता था। पिछले दिनों बीमार होने के कारण उसने 1500 रुपये उधार लिए थे। आर्थिक तंगी के कारण पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़ा होता था। विवाद के बाद अनीता ने ऐसा कदम उठाया कि पवन का पूरा परिवार ही उजड़ गया।
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थाना लाइनपार के रामनगर अस्पताल वाली गली निवासी पवन उर्फ बंटी पुत्र पूरन सिंह पत्नी अनीता, बेटी रागिनी (आठ), बेटा अंशुल (छह) एवं साहिल (चार) के साथ रह रहा था। बेलदारी करके वह परिवार का खर्चा चला रहा था। प्रतिदिन मजदूरी करके पैसा लाता और घर का खर्चा चलाता था। मकान में टीनशेड काफी पुराना होने के कारण पत्नी के कहने पर करीब 90 हजार रुपया प्राइवेट कंपनी से कर्ज ले लिया था। कर्ज लेकर टीनशेड डलवाने के साथ उसको चुकाने को दोनों जुटे थे। फिर भी कर्ज देने वाले उसे परेशान कर रहे थे। पवन ने बताया कि उसने तीन कंपनियों से कर्जा लिया था।

समय से किश्त देने के बाद भी उसे परेशान किया जा रहा था। शुक्रवार को भी कर्ज देने वाले घर आए और रुपये देने के बाद भी फेंक कर चले गए। एक दिन पहले भी कर्ज देने वालों ने रुपये फेंक दिए थे। बताया कि उनसे कहा था कि रुपये धीरे-धीरे दे रहे हैं। जैसे-जैसे मजदूरी की रकम मिलती है रुपये दे रहे। पवन की मानें तो कर्ज होने के कारण तीन सौ रुपये प्रति दिन कमाने के साथ 280 रुपये पत्नी (अनीता) को देता था। बीस रुपया जेब खर्च को बचाता था। लेकिन पिछले दिनों बीमार हो जाने के कारण 1500 रुपये और भी कर्ज लेना पड़ा। उसने पत्नी (अनीता) को इस कर्ज को 280 रुपया में चुकाने की बात कही। इसी बात को लेकर दोनों में दो दिन पूर्व काफी विवाद हुआ था।
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विवाद के दौरान बंटी ने पत्नी की पिटाई कर दी थी। आर्थिक तंगी के कारण पवन बेलदारी पर अतिरिक्त काम करने लगा था इसके चलते ही शनिवार को सुबह साढे़ पांच बजे से ही घर से काम पर निकल गया। मेहताब नगर में वह काम करने गया था। दोपहर करीब सवा दो बजे फोन से जो खबर मिली उससे पैरों तले जमीन खिसक गई। घर आकर देखा तो पत्नी अनीता, बेटी रागिनी व बेटा साहिल का शव पड़ा था। पवन के घर के आसपास के वाशिंदों को यह उम्मीद कतई नहीं थी कि अनीता इतना बड़ा कदम उठाएगी। क्योंकि शुक्रवार शाम को वह सभी से बातचीत करती रही।

पवन उर्फ बंटी के घर के दरवाजा शनिवार को सुबह से ही नहीं खुला। कोई बच्चा भी घर से बाहर नहीं आया। मकान के सामने रहने वाली मुन्नी देवी से रहा नहीं गया तो उन्होंने बाहर के दरवाजे की कुंडी को बजाते हुए कई बार अनीता..., अनीता... आवाज लगाई। कोई जवाब नहीं मिला तो पड़ोस में रहने वाले गुप्ता परिवार के साथ अन्य लोगों ने कहा कि कोई बात तो नहीं। पड़ोस के लोग आंगन के माध्यम से बाहर की कुंडी खुलवा ली।

अंदर जाकर देखा तो केरोसिन की गंध आने पर अनहोनी की आशंका लगी। अंदर भी आवाज लगाई। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और केरोसिन की गंध आने पर तत्काल यूपी-100 पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के करीब 20 मिनट बाद पुलिस की टीम पहुंची। पुलिस की टीम ने अंदर का दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा हृदय विदारक था। अनीता के साथ बच्चों को मृत देखकर हर किसी की आंखें भर आईं।

रामनगर अस्पताल वाली गली में शनिवार को महिला अनीता देवी के कदम से हर कोई स्तब्ध रह गया। हर जुबां पर एक ही बात थी मासूम बच्चों ने क्या बिगाड़ा था। अरे यह क्या किया अनीता...। कई पड़ोस की महिलाएं तो रो भी पड़ीं। हर कोई यही कहता दिखा बड़े प्यारे थे बच्चे। हालात यह थे कि जो भी सुनता वही मकान की ओर चला आ रहा था। मकान और अंदर रखा सामान तो खुद ही आर्थिक तंगी की हकीकत बयां कर रहा था। जिस कमरे में घटना हुई उस कमरे में सामान बिखरा पड़ा था। कुछ चूड़ियां टूटी पड़ी थी। ऐसा लगता है कि आग लगाते समय बड़ी बेटी रागनी ने मां को रोकने की कोशिश की होगी या फिर आग लगाने के बाद अनीता भी छटपटा कर जमीन पर लेट गई है। इस दौरान उसके हाथ की चूड़ियां टूट गईं।

मृतका अनीता देवी ने ऐसा कदम उठाने की प्लानिंग शायद एक दिन पहले कर ली थी। इसके चलते ही उसने बड़ी बेटी रागिनी को शनिवार स्कूल नहीं भेजा। यदि बेटी को स्कूल भेज देती तो शायद उसकी जान बच जाती। लेकिन पति के जाने के बाद कोई बच्चा घर से बाहर तक नहीं निकला था। माना जा रहा है कि पति के घर से जाते है महिला ने ऐसा आत्मघाती कदम उठाया है।

मकान का दरवाजा जब तोड़ा तो महिला अनीता एवं उसकी बेटी रागिनी जली अवस्था में दोनों के शव सटे मिले। आशंका है कि अनीता ने आग को लगाने के बाद बच्चों को भींच लिया। लेकिन किसी तरह से अंशुल दूर हो गया। इसके कारण उसकी जान बच गई। वहीं छोटे बेटे साहिल का शव दूर मिलने एवं शरीर पर जले के निशान कम होने से आशंका है कि उसकी मौत दम घुटने से हुई।
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