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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है...

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कासगंज। 1857 के आपात कालीन दौर में देश में अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध स्वतंत्रता की लड़ाई का विगुल बजा तो दूसरे भारतवासियों की तरह सहावर के चौधरी मुहम्मद अली खान के तेवर भी बदल गए। उन्होंने आजादी की लड़ाई में अपने वंशजों और मित्रों के साथ भरपूर हिस्सा लिया।

इस जमाने में अंग्रेजों की अधिकतर सरकारी फौज की स्थानीय नवाब और क्रांतिकारियों के असंगठित फौजों से छोटी-छोटी झड़पों से लेकर बड़े संग्राम तक हुए। चौधरी मुहम्मद अली खान के मालागढ़ के नवाब वलीदाद खान और नवाब फर्रूखाबाद से मजबूत संबंध थे। इन्होंने मिलकर बड़े आत्मविश्वास के साथ हालात का सामना किया।
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दिसंबर 1857 में अंग्रेजी फौजों ने नवाब फर्रूखाबाद की फौजों को पूरी तरह मात देकर एटा के इलाकों पर दोबारा अपनी अमलदारी कायम की तो अंग्रेजी फौज की इस बटालियन के सिपाही जिसका कमांडर कर्नल स्टीवन था, चौधरी मुहम्मद अली खान की गढ़ी के मुख्य द्वार के बंद फाटक को हाथियों से तुड़वाकर अंदर आ गए। चौधरी मुहम्मद अली को गिरफ्तार करके बरेली भेज दिया गया। बरेली में स्पेशल कमिश्नर क्लारेस्ट वारश्नना की अदालत में उन पर बगावत के जुर्म में मुकदमा चलाया गया। उसके बाद उनके परीवारीजनों के घरों में घुसकर उन्हें मारा पीटा और गिरफ्तार किया गया।


दो सिपाही कमर अली खान के मकान में घुसे तो वह अपनी जान बचाने के लिए घर की अटारी पर कपास के बोरों में घुस गए। कर्नल स्टीन के सिपाहियों ने बोरों में आग लगा दी। कमर अली खान उसमें जलकर शहीद हो गए। कमर अली खान के भाई नासिर अली खान शमसाबाद से वापस आ रहे थे। रास्ते में अंग्रेजी फौजों ने उनकी घोड़ी को घेरकर उन्हें गोलियों से घायल कर दिया। घायल अवस्था में नासिर अली खान किसी तरह छुप-छुपाकर अपने घर पहुंच गए।

अंग्रेजी सिपाही रक्त के चिन्हों द्वारा उनके घर तक पहुंचने में सफल हो गए। जहां नासिर अली खान के युवा पुत्र मजहर अली खान ने उनकी रोक-टोक की तो अंग्रेजी फौज के सिपाहियों ने उन्हें उसी जगह गोली मारकर शहीद कर दिया। घायल नासिर अली खान को गिरफ्तार कर लिया गया। नासिर अली खान युवा पुत्र की मृत्यु से बहुत बेचैन थे। गिरफ्तार करके उन्हेें घर के दरवाजे तक ही लाया गया था, दरवाजे तक पहुंचते ही उनकी मृत्यु हो गई।
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कमर अली खान के तीसरे भाई गौस मुहम्मद के पुत्र हिमायत अली खान व विलायत अली खान बाहर से जब वापस सहावर आ रहे थे तो रास्ते में उन्हें अपने चचा और भाई की शहादत की सूचना मिली। वह शस्त्र लेने बढ़े तो अंग्रेज सिपाहियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और बरेली जेल भेज दिया। उनपर भी बगावत का मुकदमा चलाकर चौधरी मुहम्मद अली खान के साथ गोलियों का निशाना बना दिया गया। भारत की प्रथम स्वतंत्रता की लड़ाई में चौधरी मुहम्मद अली खान व उनके परिवारीजनों का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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