एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिव्यांगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की कवायद कर रहे हैं तो दूसरी ओर जिले की सरकारी मशीनरी दिव्यांगों तक योजनाएं पहुंचने ही नहीं देना चाहती। आलम यह है सालभर में महज 99 दिव्यांग ही यूनिक आईडी पा सके हैं, जिलेभर में 31245 दिव्यांग हैं।
पिछले साल शासन ने जिले के दिव्यांगों के लिए एकीकृत प्रणाली के साथ जोड़ने के निर्देश दिए थे। इसका प्रमुख उद्देश्य दिव्यांगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाना है। इसके लिए शासन ने जिले के अधिकारियों को दिव्यांगों के आधार कार्ड फीड कराने के लिए कहा था। आलम यह रहा कि साल भर में दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग महज 99 दिव्यांगों को ही आईडी जारी कर सका। शासन ने इसे लेकर खासी नाराजगी जताई है। दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग के निदेशक आईएएस अनूप यादव ने डीएम को पत्र लिखकर असंतोष जताया है। उन्होंने डीएम को पत्र लिखकर अधिकारियों को अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
उपकरण बांटे लेकिन यूनिक आईडी नहीं
जिले में दिव्यांगों को फरवरी में जिला प्रशासन ने उपकरण वितरित किए। करीब 4500 दिव्यांगों को ट्रायसाइकिल, बैशाखी आदि मशीनें उपकरण दिए गए लेकिन दिव्यांगों को यूनिक आईडी देने की व्यवस्था फेल नजर आई।
प्रचार-प्रसार का अभाव
जिले में दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग का हाल बेहद खराब है। एक महिला अधिकारी के निर्देशन में विभाग चल रहा है। यहां आलम यह है कि दिव्यांगों को चक्कर काटने पड़ते हैं लेकिन सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता। पेंशन जैसे छोटे काम के लिए दिव्यांग परेशान नजर आते हैं। अधिकारी को फोन उठाने की फुरसत नहीं है तो दिव्यांगों की शिकायतें सुनना दूर की बात है।
सीएमओ भी नहीं ले रहे रुचि
दिव्यांगों को यूनिक आईडी दिलाने में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी तय की गई है लेकिन सीएमओ भी मामले में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे में दिव्यांगों की दिक्कतें बढ़ रही हैं।
आंकड़े
जिले में दिव्यांग : 31245
इनको मिली यूनिक आईडी : 99
इनको मिलती है पेंशन : 10625
2017 में शासन ने दिए थे निर्देश