गर्मी शुरू होते ही आग लगने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। छोटी सी चिंगारी कब शोला बन जाए अंदाजा भी नहीं होता है। पिछले वर्ष तमाम तैयारियों के बावजूद भी लाखों का नुकसान हुआ था और दमकल विभाग हांपता नजर आया। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया। आलम यह है कि जलेसर अभी तक अग्नि शमन विभाग को जगह तक नहीं मिल पाई है।
अगर गत वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाले तो उससे साफ हो रहा है कि आग के चलते लोगों को लाखों रुपये के नुकसान का सामना आग लगने की वजह से करना पड़ा। आलम यह है कि गत वर्ष 133 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुई थी। इसमें से सात घटनाओं में लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। अलीगंज कस्बा में दो मासूम बच्चियों की मौत भी आग लगने की वजह से हुई थी। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष विभाग के पास स्टाफ की संख्या तो बढ़ गई। लेकिन अफसोस इस बात है कि जिले की लगभग 20 लाख लोगों को के बीच अग्नि सुरक्षा प्रदान करने के लिए मात्र दो दमकल की गाड़ियां हैं।
पांच जवानों के सहारे अलीगंज
दमकल की एक गाड़ी अलीगंज तहसील को दी गई है। जहां पांच कर्मचारी तैनात है। जबकि जलेसर तहसील में अभी तक विभाग को जमीन नहीं मिल पाई है। जहां गाड़ी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। अगर कोई घटना घटित होती है तो 28 किमी दूर एटा से ही गाड़ी जाएगी।
गुस्साए लोगों ने लगा दी गाड़ी में आग
मुख्यालय पर पहले तीन दमकल की गाडिय़ा हुआ करती थी। लेकिन एक गाड़ी को 2015 में कचहरी रोड पर आग के हवाले कर दिया था। उस वक्त आरोप लगा था कि दमकल की गाडिय़ा देर से पहुंची, जिस कारण फोम की दुकान में आग विकराल हो गई थी। लोगों के गुस्से ने दमकल की गाड़ी में आग लगा दी, जिसकी आज तक भरपाई नहीं हो पाई।
आंकड़े-
20 लाख कुल जिले की जनसंख्या
133 गत वर्ष हुई आग लगने की घटनाएं
02 गाडी है अग्नि शमन विभाग के पास
2015 में एक गाड़ी का लगा दी गई थी आग
पिछले वर्ष 133 आग की घटनाएं हुई थी जिनमें सात बड़ी घटनाएं थी, जिनमें एक एक लाख से अधिक का नुकसान हुआ था। अलीगंज में दो बच्चियों की आग में जलकर मौत हो गई थी। इस वर्ष 11 जवान नये मिले हैं जिससे विभाग घटनाओं पर आसानी से काबू पाने में कामयाब रहेगा।
शिव दयाल शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, एटा।