गोवर्धन (मथुरा)। भक्तों ने नव संवत्सर गिरिराज जी की शरण में मनाया। भक्तों ने सप्तकोसीय गिरि-परिक्रमा लगाई। गिरिराज मुकुट मुखारबिंद पर गिरिराज जी के विग्रह के सेवायत त्रिलोकी नाथ शर्मा और अर्जन पुजारी ने प्रात: चार बजे दूध, दही, शहद, घी, गंगा जल और जड़ी बूटियों से अभिषेक किया। शाम को फूल बंगला सजा कर शृंगार किया गया।
प्रभु को भांग-ठंडाई का भोग लगाया गया। शाम छह बजे मंदिर प्रांगण में समाज गायन हुआ। होली गायन के बाद मुखारबिंद मंदिर से ढप, ढोल मृदंग के साथ समाज गायन करते हुए गिरिराज जी का डोला प्रारंभ हुआ। जगह-जगह फूलों की बारिश हुई। डोला की जगह-जगह आरती उतारी गई।
लक्ष्मी नवग्रह वाटिका पर कैलाश चंद मिश्र ने हवन किया। इस अवसर पर कुंजबिहारी भारद्वाज, चेतन्य कृष्ण, आकाश मिश्रा आदि थे। दानघाटी मंदिर पर सेवायत रामेश्वर पुरोहित ने गिरिराज जी के विग्रह की विशेष पूजा-अर्चना की। फूल बंगला सजाया। गिरिराज संत सेवाश्रम पर महंत संत राधामोहन दास रघुनाथ सिद्ध ने नवसंवत्सर पर विशेष पूजा अर्चना की। राधा श्याम सुंदर मंदिर, देवकीनंदन महाराज मंदिर पर विशेष आयोजन हुआ। प्रात:काल नवरात्र के प्रथम दिन मंसा देवी, चामुंडा देवी, कैला देवी मंदिर पर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की।