जलेसर। जिले के एक मात्र पर्यटक स्थल पटना पक्षी बिहार पर अव्यवस्थाआें के चलते गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अप्रवासी पक्षियों की संख्या काफी कम रही है। मौजूदा समय में करीब 25 हजार पक्षी आए हैं।
विदेशाें एवं हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में बर्फ बारी के चलते हजारों प्रवासी पक्षी प्रत्येक वर्ष पटना पक्षी बिहार में पिछले कई वर्षों से आते रहे हैं। भारी शीतकाल के दौरान इनकी संख्या लाखों में पहुंच जाती थी। पक्षियाें के लिए सैैकड़ाें हेक्टेयर मे फैली विशाल झील एवं खजूर के वृक्षाें की विशाल झाड़ी में भोजन एवं आराम का उचित स्थान मिलने से असुविधा भी नहीं होती थी लेकिन बीते दो वर्षों से वर्षा नाम मात्र की होने के कारण एवं शासन प्रशासन की उपेक्षा के चलते झील में पानी की कमी हो जाती थी। प्रवासी पक्षियों को भोजन की तलाश में भटकने को मजबूर होना पड़ता है। तमाम असुविधाओं के चलते प्र्रवासी पक्षियाें नेे पटना पक्षी बिहार से मुंह मोड़ लिया है। इन दिनाें में पक्षी बिहार में जहां लाखाें पक्षी मौजूद रहते थे वहां अब हजारों पक्षी ही दिखाई देते है। जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो जिले का एक मात्र पर्यटक स्थल विकसित होने से पूर्व ही उजड़ने न लग जाएं।
तीन वर्षा से नहीं मिला विकास के लिए धन
जिले के एक मात्र पर्यटक स्थल पटना पक्षी बिहार को केंद्र, प्रदेश एवं जिलास्तर से विकास के नाम पर कोई धन प्राप्त नहीं हुआ। नाम मात्र के लिय आई धनराशि साफ-सफाई में ही खर्च हो जाती है। वन क्षेत्राधिकारी माह में एक दो दिन के लिए खाना पूर्ति के लिये आते हैं। करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले पक्षी बिहार की सुरक्षा के लिए दो परमानेंट कर्मचारी एवं दो डेली वैस कर्मचारी है। सफाई कर्मी तो एक भी नहीं है।
चालीस प्रजातियाें के है पक्षी मौजूद
जलेसर। तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद पर्यटक स्थल पटना पक्षी बिहार में 40 प्रजातियाें के प्रवासी पक्षी एवं सैकड़ों भारतीय प्रजातियों के पक्षी आज भी पक्षी बिहार में मौजूद है। इसमे बार हैडेडगूज, स्पून बिल, कारमोरेट, सायवेरियन डंक, परपल हैरान, कैटल, इगरेट, पेटेड स्टार्क, ब्लेक नेक्डस्टार्क, स्पून बिल, बृहमनी डक, पिनटेल, स्पाटबिल, मलार्क, गर्गनी टील, शावलर, हनी बजर्ड आदि सैकडो प्रजाति के पक्षी है