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हिंदी को किसी पहचान की जरूरत नहीं : तेजप्रताप

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हिंदी - फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा सेंट थामस स्कूल में साहित्यकार डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक जन्म शताब्दी समारोह मनाया गया। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के साथ ही साहित्य साधना पर चर्चा की। कार्यक्रम में साहित्य सेवियों को सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम में सांसद तेजप्रताप सिंह यादव ने कहा कि हिंदी की आज भी संपूर्ण पहचान है। हिंदी को किसी पहचान की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा हिंदी की पक्षधर रही है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने हिंदी के उन्नयन के लिए कई प्रयास किए हैं। हमको बच्चों में हिंदी के प्रति संस्कार पैदा करने चाहिए। हिंदी साहित्य सम्मेलन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. प्रदीप दीक्षित ने कहा कि युवाओं को हिंदी से जोड़ने की जरूरत है।

मुक्तक सम्राट लाखनसिंह भदौरिया ने कहा हिंदी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ानी चाहिए। कुश चतुर्वेदी ने कहा कि आज कुछ कवियों ने हिंदी कविता को बाजार की चौखट तक पहुंचाकर हिंदी साहित्य का नुकसान किया है। रामबाबू गौतम ने कहा कि अपनी बोली में कही हुई बात कानों में अमृत सा घोल देती है। डा. आदित्य मिश्रा ने कहा कि लक्ष्मी शंकर निशंक गद्य को भी पद्य की तरह लिखने का माद्दा रखते थे।
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डॉ. रामसनेही लाल पाराशर ने कहा बाजारीकरण के दौर में लोकप्रिय कविता व अच्छी कविता के अंतर को समझें। सत्यसेवक मिश्र ने कहा लक्ष्मीशंकर अपने दौर के साहित्यिक योद्धा रहे हैं। संयोजक दीन मोहम्म्द दीन ने आभार जताया। डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य, विधायक ब्रजेश कठेरिया, आशुतोष यादव बिल्लू, बदन सिंह मस्ताना, डा. सूर्यमोहन सक्सेना, संजय दुबे, जेसी त्रिपाठी, फादर नोबी, फादर राजू, फादर थामस, उमेशचंद्र दुबे, कायमसिंह यादव, शफी मंसूरी, हाकिम सिंह यादव आदि रहे।
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