मैनपुरी। तीन कोचों की तैनाती के बीच अव्यवस्थाओं के चलते आखिर जिले से खेल प्रतिभाएं कैसे निकलें। करोड़ों की लागत का स्टेडियम तो है लेकिन युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए कोच की नहीं हैं। इससे युवाओं ने स्टेडियम में आना ही बंद कर दिया है।
बाईपास रोड स्थित पंडित जवाहर लाल नेहरु का निर्माण करोड़ों की लागत से कराया गया था। इसमें कोच की तैनाती तक नहीं हुई है। इससे युवा अब स्टेडियम से दूर होते जा रहे हैं। वहीं, युवा निजी स्तर पर ही प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण लेने को मजबूर हो रहे हैं।
फुटबाल, बैडमिंटन और एथलेटिक्स के लिए नहीं हैं कोच
स्टेडियम में केवल तीन कोच की अंशकालिक तैनाती है। क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबाल के लिए कोच हैं। जबकि फुटबाल, बैडमिंटन, एथलेटिक्स के लिए कोच की तैनाती ही नहीं है। तरणताल तक के लिए स्टेडियम में कोच नहीं है, उसका संचालन केवल एक अंशकालिक जीवनरक्षक के सहारे ही किया जाता है।
बहुउद्देश्यीय हाल पर लटकता है ताला
स्टेडियम में 10 साल पहले 3.85 लाख की लागत से बहुउद्देश्यीय हाल बनवाया गया था। इसमें वेटलिफ्टिंग के साथ ही कुश्ती के खेल के लिए योजना बनाई गई थी। अब हाल पर ताला लटकता रहता है।
हास्टल में भी होती खानापूरी
खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम में बने हास्टल में भी खानापूरी होती है। हास्टल में क्रिकेट के 25 तथा वॉलीबाल के 15 बच्चे रहते हैं। जिनसे 2500 रुपया वार्षिक शुल्क जमा कराया जाने के बाद सुविधाएं दी जाती हैं। स्टेडियम में वॉलीबाल के 51, क्रिकेट के 25 तथा हॉकी के 46 बच्चे पंजीकरण कराए हुए हैं।
वर्जन-
स्टेडियम में कोच की तैनाती के लिए कई बार शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। कोच नहीं होने से बच्चे नहीं आते हैं। बहुउद्देश्यीय हाल सुविधाओं के अभाव में सार्थक नहीं हो पा रहा है। तरण ताल में जीवन रक्षक ही बच्चों को तैराकी का प्रशिक्षण देते हैं।
केपी सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी
राजनीतिक दृष्टि से कमजोर जिला होने के कारण सुविधाओं का अभाव है। जिले के नेताओं ने भी स्टेडियम में सुविधाएं बढ़ाने के लिए आज तक कोई पहल नहीं की है।इससे यहां की प्रतिभाओं में निखार नहीं आ रहा है।
मणिकांत चतुर्वेदी, पूर्व क्रिकेटर