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गंगा की बाढ़ से तटवर्ती इलाकों में बढ़ रहीं मुसीबतें

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आबादी में पहुंचा गंगा का पानी।
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कासगंज।
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जिले में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। ग्रामीण आबादी के बीच पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों को काफी मुसीबतें झेलनी पड़ रहीं हैं। ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर अपना सामान ले जाना शुरू कर दिया है। सहावर के अजीतनगर इलाके में बाढ़ का पानी आने पर ग्रामीणों ने पानी को रोकने के लिए सड़क काट दी। जिससे पानी दूसरे क्षेत्र की ओर निकल सके।
गौरतलब है कि जिले में एक सप्ताह से मीडियम फ्लड के हालात लगातार बने हुए हैं। ऐसी स्थिति में दो दर्जन से अधिक गांव का इलाका बाढ़ की चपेट में आ चुका है। हालांकि अभी ग्रामीणों ने गांव से पलायन नहीं किया है, लेकिन गांव के ही ऊंचाई वाले और सुरक्षित स्थानों पर अपना सामान पहुंचा दिया है। मंगलवार को गंगा के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर जलस्तर में वृद्धि हो गई।
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यह जलस्तर 163.85 के निशान पर आ गया। सोमवार को जलस्तर 163.75 के निशान पर था। मंगलवार से लगातार नरौरा से कछला ब्रिज की ओर 202072 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बना हुआ है। ऐसी स्थिति में तटवर्ती इलाकों में लगातार गंगा का पानी बढ़ रहा है। कछला के समीपवर्ती गांव लच्छी नगला,पंखिया नगला में आबादी क्षेत्र में पानी घुसा हुआ है। तमाम लोग अपनी झोपड़ी के छप्पर आदि सामान हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाते नजर आए। पशुओं को कासगंज बरेली मार्ग के किनारों पर बांध रखा है, जिससे बाढ़ के पानी से पशुओं को दिक्कतें न हों।
इन गांव के लोग अधिक मुश्किल में
सहावर इलाके सुन्नगढ़ी, शहवाजपुर, गढ़ी कैथोला, ऊलाई खेड़ा, अजीतनगर, रफाइतपुर, बमनपुरा, सिकंदरपुर वैश्य, नगला ढाव, किलौनी, किसौल, देवकली व आस पास के गांव में पानी घुस चुका है।
सोमवार की रात्रि को यह पानी और बढ़ गया जिससे ग्रामीणों में दहशत बन गई। अजीतनगर के ग्रामीणों ने तो गांव की आबाद को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए गांव की सड़क भी काट दी, जिससे गांव का आवागमन प्रभावित हो गया।
रफाइतपुर से ऊलाई खेड़ा मार्ग पर बाढ़ का काफी पानी भरा हुआ है। अजीतनगर गांव का मढ़ी आश्रम भी बाढ़ के पानी से घिरा है। आश्रम के आचार्य संगम गिरी ने बताया कि बाढ़ का पानी आ जाने से श्रद्धालुओं को आवागमन में दिक्कतें हो रहीं हैं। पटियाली के बरौना गांव में भी गंगा की बाढ़ का पानी घुस चुका है। सोरों के खड़ेरी, डिंगलेश नगर, दतलाना, बघेला आदि इलाकों के ग्रामीण भी लगातार जलस्तर में हो रही वृद्धि को लेकर चिंतित हैं।
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पशुओं के चारे का संकट गहराया
बाढ़ प्रभावित इलाकों में खेत खलियानों और आबादी में बाढ़ का पानी भर जाने के कारण पशुओं के लिए चारे का संकट गहराने लगा है। प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की भूसे की भुज्जियां पानी से घिरी हुई हैं। खेतों से चारे की कटाई नहीं हो रही। ऐसी स्थिति में ग्रामीण दूरस्थ क्षेत्र के इलाकों से चारा काट कर ला रहे हैं। ऐसी ही समस्या ईंधन को लेकर भी है। ईधन भी आस पास के इलाकों से ग्रामीण लेकर आ रहे हैं। जिससे खाना बनाया जा सके।
डिस्चार्ज-
नरौरा बैराज से 202072 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से 78899 क्यूसेक
हरिद्वार बैराज से 59365 क्यूसेक
कछला ब्रिज गेज-163.85 के निशान पर
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