जसराना (फिरोजाबाद)। सपा के ब्लाक प्रमुख का किला ढहा कर भाजपा ने जसराना की जंग जीत ली है। पंचायतों की सत्ता से सपा बाहर हो गई है। जसराना ब्लाक प्रमुख डॉ. रामपाल यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को मतदान हुआ। अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 42 और विरोध में मात्र तीन वोट पडे़। 18 बीडीसी सदस्यों ने प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
भाजपा की रणनीति पर वार्ड संख्या 28 से क्षेत्र पंचायत आकृति यादव ने डीएम नेहा शर्मा को 39 बीडीसी के शपथ पत्र के साथ जसराना के ब्लाक प्रमुख डा. रामपाल यादव को हटाने के लिए पत्र दिया था। डीएम ने एसडीएम मोहम्मद रिजवान को चुनाव अधिकारी नियुक्ति करते हुए सात जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर बहस एवं मतदान कराने की तिथि तय कर दी।
शुक्रवार को निर्धारित समय से डेढ़ घंटा देरी से शुरू हुई कार्रवाई में डॉ. रामपाल यादव पक्ष से आए तीन बीडीसी सदस्यों ने उनका पक्ष रखा जबकि अन्य सदस्यों ने उनका विरोध किया। बहस के बाद हुए मतदान में अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 42 एवं उसके विपक्ष में मात्र तीन मत पडे़।
जसराना ब्लाक में क्षेत्र पंचायत के 63 सदस्यों में से 18 ने अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। एसडीएम मोहम्मद रिजवान ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के पास होने के बाद अब डा. रामपाल सिंह यादव को ब्लाक प्रमुख पद से हटा दिया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर आगे कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर भारी मात्रा में पुलिस फोर्स मौजूद रहा।
शांतिपूर्ण कार्रवाई कराने के लिए एसपी सिटी, एडीएम उदय सिंह, तहसीलदार, नायब तहसीलदार छविराम वर्मा, सीओ जसराना संजय वर्मा, एसएचओ संजय सिंह के साथ ब्लाक एवं तहसील का स्टाफ मौजूद रहा। सीओ संजय वर्मा ने कहा कि एक पक्ष की गाड़ी से चार रायफलें मिली है।
छह बीडीसी सदस्यों पर प्रमाणपत्र न होने के कारण उन्हें गेट पर रोक दिया गया। वहीं एक बीडीसी सदस्य पर कोई पहचानपत्र न होने के कारण रोका गया। इसपर भाजपा कार्यकर्ता डा. संजीव यादव ने उन्हें अंदर ले जाने की कोशिश की तो सीओ शिकोहाबाद राजेंद्र सिंह यादव से उनकी नोकझोंक हो गई। मौके पर मौजूद एडीएम उदय सिंह एवं एसपी सिटी ने मौके पर जाकर स्थिति को संभाला। बाद में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों ने सभी को सत्यापित किया। तब कहीं जाकर सदस्यों को अंदर जाने का मौका मिला।
ब्लाक प्रमुख के खिलाफ नेतृत्व कर रहीं झपारा निवासी भाजपा कार्यकर्ता संजीव यादव की पत्नी आकृति यादव पर सदस्य होने का प्रमाणपत्र नहीं था। बाद में सचिव ने उनको सत्यापित किया तब कहीं जाकर उन्हें अविश्वास प्रस्ताव में भाग लेने का मौका मिला।
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