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मिल खराब होने से बाहर लगी गन्ना वाहनों की कतार

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गन्ना लदा ट्रैक्टर। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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कासगंज।
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चीनी मिल में आई खराबी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पांच दिन बाद भी चीनी मिल का चक्का नहीं घूम सका। टरबाइन में आई तकनीकी खराबी को सही करने के लिए गाजियाबाद से इंजीनियर पहुंचे हैं।
न्यौली चीनी मिल में 5 दिन से तकनीकी खामी आ गई है। मिल प्रशासन गाजियाबाद के इंजीनियरों की टीम से तकनीकी कमी को दूर कराने में लगा हैे। वहीं मिल बंद होने से किसानों का गन्ना मिल प्रबंधन नहीं ले रहा। इस कारण कासगंज-बरेली मार्ग पर करीब दो किलोमीटर गन्ना वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। वहीं किसान सर्द रातों में ठिठुर रहे हैं। जबकि धूप से गन्ना सूख रहा है। किराए के वाहनों से किसानों पर किराए का कर्ज बढ़ रहा है। बिक्री के बाद मिलने वाली धनराशि से अधिक किराया भुगतान करना होगा। कासगंज-बरेली मार्ग पर करीब दो किलोमीटर दूरी में वाहनों की लंबी लंबी कतारें लगी हुई हैं।
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आंकड़े-
- 500 टन गन्ना मिल के बाहर है रखा है।
- 400 से अधिक किसान खुले आसमां में गुजार रहे रात।
- 300 से अधिक किराए के वाहनों से गन्ना लाए हैं किसान।
- 11552 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हुई है गन्ने की पैदावार।
- 5 दिन से बंद है न्यौली चीनी मिल।
किया जाएगा आंदोलन
भारतीय किसान यूनियन की बैठक मंडल उपाध्यक्ष श्यामवीर सिंह के नेतृत्व में न्यौली में आयोजित हुई। यहां किसानों ने किसान यूनियन के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। मंडल उपाध्यक्ष ने मिल प्रशासन से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यदि शनिवार सुबह तक मिल में पेराई शुरू नहीं होती है तो आंदोलन किया जाएगा।
अब तक यह उम्मीद थी की गन्ना बिक्री के बाद किराए के ट्रैक्टर स्वामी को भुगतान कर देंगे, लेकिन जिस हिसाब से गन्ने की खरीद रुकी हुई है उससे लग रहा है कि अब गन्ना बिक्री से मिलने वाले भुगतान से अधिक किराया चुकाना होगा। राजवीर सिंह, लहरा।
पूरी तरह से मिल ने गन्ना किसानों की बर्बादी कर दी है। अब गन्ने से उत्थान की उम्मीद टूट चुकी है। गन्ने की खेती से पूरी तरह मोह भंग होता जा रहा है। आगामी वर्ष में गन्ना पैदा नहीं करेंगे। हरकिशोर सिंह, बघेला।
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गाजियाबाद से इंजीनियरों की टीम खामी दूर करने के लिए मिल प्रशासन ने बुलाई है। किसानों का दर्द देखते हुए काफी मन परेशान होता है, लेकिन मिल प्रशासन भी खराबी के सामने मजबूर है। चीनी मिल संचालन की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।
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