एटा। सब्जी के राजा आलू की बेकदरी ने किसानों को तो रंक बना ही दिया है। वहीं शीतगृह स्वामियों को भी खूब रुला रहा है। आलम यह है कि आलू के दामों में भारी गिरावट होने से किसान कोल्ड स्टोर में रखे आलू को लेने नहीं पहुंच रहे हैं। मजबूर होकर शीतगृह स्वामियों को आलू निकाल कर बाहर फेंकना पड़ रहा है। वहीं मंडी में नए आलू की आवक शुरू हो गई है। बावजूद इसके फुटकर में पुराना आलू आज भी दस रुपये प्रति किग्रा के भाव से बिक रहा है।
हर साल नवंबर माह में आलू की फसल की बुवाई के दौरान शीतगृहों से किसान अपना जमा आलू निकाल लेते हैं। मगर इस बार दिसंबर माह की शुरुआत हो गई। मगर अभी तक किसानों ने आलू की निकासी नहीं की है। जिले में दो दर्जन से अधिक शीतगृह है, जिनमें एक अनुपात के अनुसार पंद्रह हजार पैकेट कोल्ड स्टोरों में रखे हुए है। जिनको अब किसान लेने नहीं पहुंच रहा है।
नए आलू की शुरू हो गई आवक
मंडी में नए आलू की आवक शुरू हो गई है, जिसके चलते पुराने आलू को कोई खरीदना पंसंद नहीं कर रहा है। नए आलू का पैकेट 400 रुपये की है, जबकि पुराने आलू का पैकेट मंडी में सौ रुपये में मिल रहा है, जबकि कोल्ड स्टोर से आढ़ती 50 रुपये का पैकेट खरीदने को तैयार नहीं है। वह अपने पास रखे आलू के स्टॉक को किसी तरह खपाने में जुटे हुए है।
800 रुपये प्रति बोरे बिक चुका है आलू
सितंबर और अक्तूबर माह में आलू 800 रुपये प्रति बोरे के हिसाब से बिक चुका है। उस दौरान किसानों ने लालच के चलते आलू की बिक्री नहीं की थी। किसानों को अंदाजा था कि शायद आलू का भाव अभी और चढ़ेगा। मगर ऐसा हुआ नहीं। दीपावली के बाद एक साथ आलू के भाव में गिरावट दर्ज होती चली गई।
किसान मुकेश तोमर ने बताया कि आलू की गिरती कीमतों ने फिर से किसानों को बर्बाद कर दिया है। पिछले वर्ष तो सरकार ने तमाम आश्वासन दिए, लेकिन इस बार कोल्ड स्टोर का भाड़ा तक नहीं निकल पा रहा है। मेरे अकेले सात हजार आलू के पैकेट कोल्ड स्टोर में सड़ रहे हैं। कोई खरीदने वाला नहीं है।
भारत सिंह कोल्ड स्टोरेज के कर्मचारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि आलू के जब रेट अच्छे थे। तब किसानों को लालच था कि भाव में ओर अधिक वृद्धि होगी। मगर दीपावली के बाद एक साथ रेट गिर गया। अब किसान भाड़ा तक देने को तैयार नहीं है। जो किसान आलू लेने नहीं आ रहे है। उनके आलू को निकाल निकाल कर कोल्ड को खाली करा रहे हैं।