एटा। गांवों में मिनी सरकार बनाकर ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली ग्राम पंचायत समितियां छत को तरस रहीं हैं। आलम यह है कि जिले में 576 में से 291 ग्राम पंचायतों के पास खुद के भवन ही नहीं हैं।
ग्राम पंचायत का आलम यह है कि उन्हें बैठकें भी स्कूलों और किराए की दुकानों में करनी पड़ रहीं हैं। जिला पंचायत राज विभाग ने पंचायत भवनों की रिपोर्ट मिलने के बाद ग्राम विकास योजना में प्राथमिकता से पंचायत भवन का निर्माण कराने के निर्देश दिए हैं। जिले में अलीगंज ब्लॉक में 93 में से 49 ग्राम पंचायतों में भवन नहीं है। जैथरा में 67 में 45, सकीट में 93 में से 52, शीतलपुर में 83 में से 44, जलेसर में 57 में से 34, मारहरा में 59 में 35, निधौलीकलां में 71 में से 27 और अवागढ़ में 54 में से सात ग्राम पंचायतों के पास खुद के भवन नहीं हैं। इसके साथ ही तमाम ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां भवन खंडहर हो चुके हैं।
--
ग्राम पंचायत भवनों के संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं। पिछले वर्ष कई ग्राम पंचायतों में भवन बने हैं। जबकि कई जगह निर्माण कार्य चल रहा है। सभी ग्राम पंचायतों को ग्राम पंचायत विकास योजना में पंचायत भवन निर्माण कराने के लिए कहा गया है।
- धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ एटा
--
पंचायत सचिव का भी टोटा
जिले की ग्राम पंचायतों में कर्मचारियों का भी टोटा है। यहां एक कर्मचारी औसतन सात पंचायतों का काम देख रहा है। प्रत्येक पंचायत स्तर पर एक ग्राम पंचायत सचिव होना चाहिए, लेकिन 576 पंचायतों का जिम्मा महज 88 सचिव देख रहे हैं। इस कारण ग्रामीणों को न तो सुविधाएं मिल रहीं हैं और न उनकी समस्याओं का समाधान हो पाता है। कर्मचारियों की कमी के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।