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एक साल में भी नहीं हुआ अमर कालोनी कांड का खुलासा

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डेमो
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मथुरा। वाकई हद हो गई। पूरा एक साल बीत गया लेकिन पुुलिस अमर कालोनी कांड का खुलासा नहीं कर पाई है। विधानसभा से लेकर विधानपरिषद तक में यह केस गूंज चुका है। मां-बाप के कत्ल का खुलासा न होने पर बिटिया ने जान दे दी। लेकिन पुलिस की नींद अभी तक नहीं टूटी है।
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एक साल हो चुका है अमर कालोनी में दंपति की हत्या को। आठ मार्च 2017 की रात घर में घुसकर बदमाशों ने बनवारी और रविबाला की सिर में प्रहार करके हत्या कर दी थी और दो लाख का कैश लूट लिया गया था। पुलिस ने शुरू में तो हाथ पांव मारे लेकिन अब खामोश होकर बैठ गई है। खास बात यह है कि अधिकारियों ने तो फालोअप करना ही बंद कर दिया है।

मां-बाप के कातिल नहीं पकड़े गए तो बेटी ने दे दी जान

मां और पिता के हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए जुटी बड़ी बेटी राखी ने सिस्टम से हारकर 10 अक्तूबर को आत्महत्या तक कर ली थी। बावजूद इसके मथुरा पुलिस का दिल तक नहीं पिघला। राखी के सुइसाइड को भी छह माह बीत गया, पर आजतक पुलिस इस वारदात का खुलासा नहीं कर सकी।
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सुरक्षा घेरे में रह रहे भाई और बहन, दी हैं परीक्षाएं

मां और पिता की हत्या के बाद से बेटा राहुल और बेटी दीपा के घर पर सुरक्षा का पहरा लगा हुआ है। राहुल ने इंटरमीडिएट और दीपा ने हाईस्कूल की परीक्षा दी हैं। भाई और बहन का मां, पिता की हत्या और बहन की आत्महत्या के बाद से रो-रोकर बुरा हाल है। राहुल ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि मां, पिता और बहन की याद तो आती है, पर छोटी बहन की रखवाली के लिए बस वह जी रहे हैं।

नहीं मिल सकी राहुल को अभी तक नौकरी

मां और पिता की हत्या के बाद से कई राजनीतिक दल के नेता अमर कालोनी पहुंचे। यहां पर नेताओं ने आश्वस्त किया था कि पूरी मदद की जाएगी और सत्तारूढ़ के नेता ने राहुल को नौकरी दिलवाने का वादा किया था। आजतक न तो राहुल को नौकरी मिली और न ही न्याय मिल सका।

सीबीआई जांच को दायर है जनहित याचिका

महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ला ने अमर कालोनी की सीबीआई जांच और बच्चों को न्याय दिलवाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। हालांकि अब इस याचिका पर सुनवाई चार मई को होगी। लगातार बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई और रहने के लिए पर्याप्त इंतजाम की महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ला ने लड़ाई लड़ी है।
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