फिरोजाबाद। आदमी शरीर से विकलांग होकर कभी कमजोर नहीं होता। मन की विकलांगता कमजोर लाती है। मैने अपने जीवन में कभी दिव्यांगता को हावी नहीं होने दिया। मेरे साथ हादसा हुआ, लेकिन मैने कभी हार नहीं मानीं।
पर्वतारोहण करना बहुत ही कठिन कार्य है, लेकिन मैने इसे पूरा किया। ऊपर चढ़ने पर मौसम बहुत परिवर्तित होता गया, लेकिन मैने हार नहीं मानी। यह बात दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट फतह करने वाली पद्यमश्री से सम्मानित अरुणिमा सिन्हा ने कही। जिसे सुन लोगों में नई उमंग जागी।
शनिवार को आईवे इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिकोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि आई अरुणिमा सिन्हा मंच पर आई तो लोग उन्हें मिशाल के तौर पर देख रहे थे। उन्होंने कहा कि ऊंचाई पर चढ़ने में मौसम बदलता है, कठिनाईयां बढ़ती हैं।
अंदाजा भी नहीं रहता कि मौसम इस तरह परिवर्तित होगा। उस कठिनाई में हमें घबराना नहीं चाहिए। लक्ष्य को लेकर चलें तो मंजिल खुद मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि सात महादीप में से छह महादीप पूरे कर लिए हैं। बाकि रह गए एक महादीप पर भी जाऊंगी।
उन्होंने लड़कियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वह कमजोर नहीं हैं। मन से ताकतबर बनें। उनकी बातों को सुनकर लोगों में नई उमंग जाग उठी। उन्होंने कहा कि समस्या ये नहीं कि लक्ष्य कैसे पूरा होगा। समस्या यह है कि लक्ष्य कैसे बने। लक्ष्य बनाकर ही सफलता हासिल की जा सकती है।
दर्शकों ने उनके साथ हुए हादसे की कहानी पूछी। अरुणिमा सिन्हा ने अपनी कहानी सुनाई तो दर्शक भावविभोर हो गए। कई मिनटों तक तालियां लगातार बजती रहीं। वार्षिकोत्सव में बच्चों ने रंगारंग कार्यकमों की प्रस्तुतियां दीं। स्वच्छ भारत अभियान पर बच्चों ने नृत्य नाटिका की मनमोहक प्रस्तुति दी। कब्बाली, हनुमान चालीसा की प्रस्तुतियां भी सराहनीय रही।
आईजी नवनीत सिकेहरा ने कहा कि हमें अरुणिमा सिन्हा के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। जब अरुणिमा ने माउंट एबरेस्ट फतह किया तो पूरी दुनिया की निगाहे भारतीय बेटी पर थी। इस बेटी ने दुनिया में देश का नाम गौरवान्वित किया।