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रेल बजट: परवान न चढ़ सकी रेल की सौगात:

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एटा। आम बजट और रेल बजट एक साथ घोषित होने से रेल परिवहन को लेकर लोगों को तमाम उम्मीदें थीं। मगर रेल बजट में कुछ भी नहीं मिलने से लोगों को मायूसी हाथ लगी। जिले की रेल परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस बार बजट में केवल सीसीटीवी कैमरों और विद्युतीकरण के मुद्दे पर सरकार ने खासी कवायद की। इसके चलते एटा के लोगों को निराशा हाथ लगी।
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पिछले साल रेल बजट में जिले को एटा-कासगंज रेलवे लाइन की सौगात मिली थी। साल बीतने के बाद भी अब तक निर्माण का काम जमीन पर दिख नहीं सका। 218 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिलने के बाद भी रेलवे ने अब तक रेलवे लाइन निर्माण के लिए कवायद शुरू नहीं की। इस बार रेल बजट से लोगों को एटा-अलीगढ़ और एटा-मैनपुरी के बीच रेलवे लाइन की घोषणा होने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसे लेकर लोग नाराज नजर आए। लोगों का कहना है एटा से टूंडला तक बिछी रेलवे लाइन को आगे बढ़ाने की ओर सरकारें कोई ध्यान नहीं दे रही हैं।
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कहते हैं लोग
सरकार को रेल बजट में जिले की उम्मीद को पूरा करने की ओर विचार करना चाहिए। ताकि जिले में रेल परिवहन विकसित हो सके।
अनुज गुप्ता

जिले में रेल विस्तार की मांग वर्षों पुरानी है। बजट में मांग को पूरा करने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए थी।
राकेश यादव

सरकार को एटा को रेल बजट में रखते हुए एक तोहफा देना चाहिए था। मगर सरकार ने जिले को फिर से उपेक्षित कर दिया।
विवेक कृष्ण कुलश्रेष्ठ

सरकार को जिले के रेलवे विस्तार के लिए घोषणा करनी चाहिए थी। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से जिला जूझ रहा है।
मेधाव्रत शास्त्री
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