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शहीद सैनिक को अंतिम विदाई देने उमड़ा गांव

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भोगांव। तोप की सफाई करते समय घायल हुए सेना के जवान की उपचार के दौरान मौत हो गई। शनिवार को सैनिक का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया। शहीद सैनिक को साथियों ने सलामी देकर अंतिम विदाई दी। इस बीच पूरा गांव अंतेष्टि स्थल पर उमड़ पड़ा।
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जमौरा निवासी 40 वर्षीय नवकांत सिंह अमृतसर में सेना में हवलदार के पद पर तैनात थे। 23 दिसंबर को वर्कशाप में तोप की सफाई करते समय स्प्रिंग निकलकर उनके शरीर में घुस गई जिससे वह घायल हो गए। उनको अमृतसर सैनिक अस्पताल में बाद में हालत गंभीर होने पर जालंधर सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। सैनिक की मौत की जानकारी होते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया।

सैनिक का शव शनिवार की सुबह लगभग दस बजे गांव पहुंचा। क्षेत्र के हजारों लोग सैनिक के अंतिम दर्शन को पहुंच गए। दोपहर दो बजे राजकीय सम्मान के साथ अमृतसर से आए सूबेदार केआर चौधरी, नायब सूबेदार सुनील कुमार, हवलदार दीवान सिंह, अतुल बारेकर, हरेंद्र सिंह, आगरा के सूबेदार भगवान सिंह, संजय पाटिल, नायक आर पुजारी, लांसनायक संतोष, सीपी त्रिपाठी की टुकड़ी ने शहीद सैनिक को गार्ड ऑफ आनर एवं गारद की सलामी देकर अंतिम विदाई दी।
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श्रद्धांजली देनेे पहुंचे गांव
शहीद सैनिक को विधायक रामनरेश अगिभनहोत्री, एसडीएम संदीप कुमार, सीओ परमानंद पांडेय, थाना प्रभारी शशिकांत शर्मा, कलक्टर सिंह राजपूत, राजीव पांडेय, सुरेंद्र चौहान, पूर्व मंत्री आलोक शाक्य, मनोज यादव, बासुदेव राजपूत, सपा जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा आदि ने गांव पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।

अब कौन देगा फीस
शनिवार को सैनिक का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा वैसे ही पत्नी सुशाीला का रो रोकर बुरा हाल हो गया। 12 साल की बेटी प्रिया और नौ साल के पुत्र प्रांशू भी सैनिक के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगे। मुंह पर एक ही बात दो महीने पहले आए तब घुमाने की बात कहकर गए थे। अब कौन घुमाने ले जाएगा और फीस देगा।

21 साल पहले सेना में हुए भर्ती
शहीद सैनिक नवकांत 1997 में सेना में पुणे से भर्ती हुए थे। ग्रामीणों का कहना था जब भी छुट्टी आते तो सभी से न केवल मिलते बल्कि उनकी समस्याओं का अधिकारियों से निराकरण कराने थाने और तहसील भी जाते थे। युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। उनका एक भाई ललित कुमार बाह आगरा में लेखपाल है।
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