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विभागों का खजाना खाली, विकास योजनाओं पर ब्रेक

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फिरोजाबाद। आंकड़ों पर गौर करें तो जिला योजना मजाक बन गई है। मार्च में वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाएगा और जिला योजना में अभीतक 1.40 प्रतिशत बजट मिला है। चौंकाने वाली बात यह है कि 47 विभागों में से मात्र चार विभागों को बजट मिला है।
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दो अरब 65 करोड़ की जिला योजना को जब प्रभारी मंत्री नीलकंठ तिवारी ने मंजूरी दी तो लगा कि जिले के विकास को पंख लगेंगे। यूं तो प्रमुख विभागों को अलग योजनाओं में जिला योजना से इतर काफी बजट मिलता है, लेकिन जिला योजना के बजट का खजाना खाली है। अब तक मात्र 3.72 करोड़ रुपये बजट मिला है। ऐसे में बजट के अभाव में अधिकांश विभाग खाली हाथ बैठे हैं।

जिला योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18 में जिले के 47 विभागों को विभिन्न योजनाओं के संके लिए करीब 2.66 अरब रुपये का बजट अनुमोदित हुआ था। लेकिन वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण तक कुछ चुनिंदा विभागों को छोड अधिकांश विभागों को बजट के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं मिली। जिन विभागों को योजनाओं की पूर्ति के लिए बजट मिला उनमें कृषि विभाग को 22.71 लाख, पशुपालन को 22.55 लाख, वन विभाग को 2.74 करोड़ और निजी एवं लघु सिंचाई विभाग को 43.9 लाख रुपए बजट मिला।
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ग्राम विकास, खादी एवं ग्रामोद्योग, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पंचायती राज, यूपी नेडा, युवा कल्याण एवं विकास दल, खेलकूद, अनुसूचित जाति कल्याण, सेवायोजन, महिला, बाल कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण जैसे महत्वपूर्व विभागों को वित्तीय वर्ष अंतिम चरण तक शासन ने फूटी कौड़ी उपलब्ध नहीं कराई।

ग्रामीण इलाकों में पंचायत घर का निर्माण कार्य रूका, अंत्येष्टि स्थल के जीणोद्वार, प्राथमिक स्कूलों की चारदीवारी का निर्माण, माध्यमिक शिक्षा विभाग में व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन रुके हैं। बाल विकास परियोजना में आंगनबाड़ी कें द्रों पर पंजीकृत बच्चों को सप्ताह में एक बार मिलने वाला ड्राई फ्रू ट वितरण कार्य प्रभावित है।
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