फिरोजाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में कांच उद्योग के खिलाफ दायर याचिका के मामले में पिछले तीन तारीख में टीटीजेड अथॉरिटी एवं उद्योग विभाग की ओर से कोई पैरवी नहीं हो रही है।
बुधवार को सुनवाई के समय कोई अधिवक्ता न पहुंचने पर चीफ जस्टिस न कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।
नई दिल्ली की सेफ संस्था ने एनजीटी में 143 कांच इकाइयों के खिलाफ याचिका दायर की जिसमें कांच उद्योग से बढ़ते प्रदूषण, क्षमता विस्तार, बिना सहमति इकाइयां संचालित होने, उद्योग विभाग के अफसरों के नियम विरुद्ध इकाइयों को संचालन की अनुमति देने के मामले में शिकायत की गई है। एनजीटी के निर्देश पर टीटीजेड अथॉरिटी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उद्योग विभाग सहित सभी विभाग पहले ही अपना जवाब भी दाखिल कर चुके हैं।
मामले में दो साल से लगातार तारीख पड़ रही है लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका। इधर दो साल से कोई निर्णय होता न देख जिम्मेदार अफसरों ने एनजीटी में पैरवी करने से मुंह मोड़ लिया। हालात यह हैं कि पिछली तीन तारीखों में टीटीजेड और उद्योग विभाग का कोई अधिकारी एनजीटी में नहीं पहुंचा।
कांच उद्योग के मामले में दायर याचिका पर बुधवार को भी सुनवाई होनी थी, परंतु सुनवाई में उद्योग विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व टीटीजेड से कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। एनजीटी के चीफ जस्टिस ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए अफसरों को सख्त चेतावनी दी है। अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।
कांच उद्योग को बंद करने का षडयंत्र रच रहे अफसर
यूपीजीएसम के अध्यक्ष राजकुमार मित्तल का कहना है कि एक ओर उद्योग विभाग व प्रदूषण बोर्ड के अफसर सालों पूर्व बंद हो चुकी इकाइयों को चालू कराने का कोरा नाटक कर रहे हैं। वर्तमान में संचालित इकाइयों की नियमित पैरवी न कर वह उद्योगों को बंद करने का षडयंत्र रच रहे हैं। यही हालात रहे तो संचालित उद्योग भी संकट में आ जाएंगे।