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अधूरे मानक के साथ दौड़ रहे स्कूल वाहन

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अधूरे मानक के साथ दौड़ रहे स्कूल वाहन - फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश ताक पर हैं। स्कूल बसें आदेशों की धज्जियां उड़ाकर फर्राटा भर रही हैं। आलम यह है कि स्कूल बसों में जीपीएस डिवाइस तक नहीं है। वहीं खिड़िकयों पर सुरक्षा प्रबंध को लगाई जाने वाले रैलिंग भी नहीं हैं। इसके साथ ही कोहरे और सर्दियों को देखते हुए वाहनों में न तो फॉग लाइट और न ही खिड़कियों में शीशे लगे हैं। सुरक्षा उपायों की बात करें तो स्कूल के वाहनों में अग्निशमन यंत्र, हेल्पर तक नहीं हैं।
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लगातार जिले में स्कूल बसों और वाहनों के हादसों के बाद भी स्कूल प्रबंधन चेत नहीं रहा है और न ही प्रशासन कोई कवायद कर रहा है। आलम यह है कि बसों मे ग्लोबल पॉजिशिनिंग सिस्टम(जीपीएस) तक नहीं है। खिड़कियों से रैलिंग और लोहे की रॉड गायब है। बच्चे जान को जोखिम में डालकर घर से स्कूल तक का सफर तय करते हैं। इसके अलावा सर्दियां शुरू होने के साथ ही बसों में फॉग लाइट और खिड़कियां नहीं हैं। साथ ही प्राथमिक उपचार को लगाए जाने वाले बॉक्स भी नदारद रहते हैं। जिले में किसी भी स्कूल बस में अग्निशमन यंत्र नहीं लगा है। इसके साथ ही बसों में बच्चों को उतारने और चढ़ाने के लिए हेल्पर भी नहीं हैं। ऐसे में हादसों को लेकर स्कूल संचालक अब तक चेतते नजर नहीं आ रहे हैं। साथ ही प्रशासन भी कोई कार्रवाई करता नजर नहीं आता है।
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कहते हैं अभिभावक
स्कूल बसों में बच्चों को भेजने में डर लगा रहता है। स्कूल प्रबंधन से इसे लेकर कई बार शिकायत की है।
निशा चौहान

स्कूल बसों में खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। बच्चे सर्दी में ठिठुरते हुए जाते हैं। स्कूल प्रबंधन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
मोनालिका

स्कूल बसों में कोई व्यवस्थाएं नहीं होतीं। बच्चों को मजबूरी में बस से भेजना पड़ता है। स्कूल प्रबंधन से शिकायत भी की है।
भारती तोमर

स्कूल प्रबंधन को वाहनों को दुरस्त रखना चाहिए। प्रशासन को भी स्कूल बसों के निरीक्षण में सजगता दिखानी चाहिए।
विमलेश वर्मा
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