मथुरा/वृंदावन। देवोत्थान एकादशी को तीन वन की परिक्रमा के लिए जनसमूह उमड़ पड़ा। लाखों भक्तों ने इस पर्व पर मथुरा, वृंदावन और गरुड़ गोविंद की 18 कोसीय परिक्रमा लगाई। राधे-राधे के स्वर के बीच संकीर्तन करते श्रद्धालुओं की भक्ति देखते ही बनती थी।
प्राचीन मान्यता है कि कंस वध के बाद चतुर्वेदी समाज ने देवोत्थान एकादशी के दिन तीन वन मथुरा, वृंदावन और गरुड़ गोविंद की परिक्रमा की थी। इसके अलावा चार माह बाद देव जागने पर ब्रजवासियों ने कृष्ण की परिक्रमा की थी। देवोत्थान एकादशी की मध्य रात को इस 18 कोसीय परिक्रमा की शुरुआत हो गई थी। इस तरह रात भर परिक्रमा में राधे-राधे के स्वर गूंजते रहे।
तीन वन के पथरीली और कटीली राह भी परिक्रमार्थियों की हिम्मत नहीं डिगा सकी। 54 कोस की तीन वन परिक्रमा में छोटे बच्चे और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल रहे। सोमवार को देर शाम तक परिक्रमा का दौर चला। उधर, देवोत्थान एकादशी की परिक्रमा में मूली, गन्ना की जमकर बिक्री हुई। वहीं, देवोत्थान एकादशी के दिन घर-घर में देव पूजा-अर्चना की गई। रंगोली सजाई गई। दीवारों पर देवों की आकृति बनाकर पूजन किया गया। पूजन के लिए गन्ना, मूली, आंवला ले जाया गया।
वृंदावन में कार्तिक माह की देवोत्थान एकादशी के पर्व पर सोमवार को जहां परिक्रमार्थियों ने वृंदावन की परिक्रमा कर श्रद्धा और विश्वास के साथ मनौती मांगी। वृंदावन वासियों ने वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा दी, वहीं मथुरा के लोगों ने वृंदावन होकर तीनों वनों की परिक्रमा लगाई। वहीं, परिक्रमा मार्ग में ट्रैक्टर, बस और टेंपो परिक्रमा मार्ग में कई जगह दौड़ती दिखाईं दिए।
इस कारण परिक्रमार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, स्वामी हरिदासीय राधाप्रसाद सेवा ट्रस्ट ने संत विश्वेश्वरदास और श्यामसुंदरदास की पुण्यतिथि प्रिया प्रियतम मिलन महोत्सव के रूप में मनाई। भक्तों ने एकादशी पर परिक्रमार्थियों को फल, मिष्ठान, खीर बांटे। महामंडलेश्वर राधाप्रसाद देवजू, महंत मोहिनी बिहारी शरण रहे। राधाप्रसाद धाम पर लगे स्वास्थ्य शिविर में चोटिल परिक्रमार्थियों का उपचार डा. एसबी अग्रवाल के निर्देशन में किया गया। दाऊदयाल अग्रवाल, बिहारीशरण, हरीश अग्रवाल, निहाल सिंह, आशीष थे।