फिरोजाबाद। दशहरा पर बुराई के प्रतीक रावण का जगह-जगह पुतला दहन होगा। कहा जाता है कि रावण के साथ युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम बाण छोड़ते थे, लेकिन हर बार रावण जिंदा हो जाता था। इसलिए दशहरा पर दशानन के पुतले के साथ दस शीश भी जोड़े जाते हैं, जो तमाम बुराइयों के प्रती हैं। सुहाग नगरी दशकों से ऐसी ही दस ज्वलंत समस्याओं से जूझ रही है, जिसका अंत अब तक नहीं हो पाया है। हर वर्ष रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन समस्याओं के रावण का अंत अभी होना शेष है।
समस्या - एक
नहीं बदली नई आबादी की सूरत
वर्ष 2008 में नगर पालिका (वर्तमान में नगर निगम) से सटी 13 ग्रामसभाओं को पालिका में शामिल किया गया। नगर निगम सीमा में शामिल 13 ग्रामसभा और नई आबादी वाले क्षेत्रों की दस साल में भी सूरत नहीं बदल गई। यहां करीब तीन लाख से अधिक आबादी अब भी कच्ची और दलदली गलियों में रहने को मजबूर है। यहां जलनिकासी को नाले-नालियां तक नहीं बन सकीं।
समस्या - दो
नासूर बनी जाम की समस्या
सुहागनगरी में जाम की समस्या वर्षों से नासूर बनी हुई है। शहर का प्रमुख सुभाष तिराहा या प्रमुख सदर बाजार, सर्विस रोड हो अथवा अन्य रास्ते हर जगह जाम नजर आता है। कई बार योजनाएं बनीं, लेकिन वह फाइलों में ही दम तोड़ गईं। सात लाख से अधिक आबादी वाले शहर के बाशिंदे जाम की समस्या से जूझते दिखाई देते हैं।
समस्या - तीन
सुहागनगरी के माथे पर गंदगी बिंदी
कांच की चूडिय़ों के नाम से विख्यात फिरोजाबाद शहर के माथे से गंदगी का कलंक नहीं मिट सका। केंद्र व प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च कर रही है, परंतु नगर निगम प्रशासन की नाकामी के कारण शहर स्वच्छ नहीं हो सका। शहर के प्रमुख मार्गों, बाजारों से लेकर गली मोहल्लों में गंदगी के ढेर नजर आते हैं। घनी आबदी के बीच खत्ताघर जैसे हालत बने हुए हैं।
समस्या - चार
बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती भी बेअसर
सुहागनगरी में भले ही कांच उद्योग का संचालन नेचुरल गैस से हो रहा है, लेकिन प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा। हाईकोर्ट, एनजीटी की रोक के बावजूद धड़ल्ले से कोयले की भट्ठियां, डीजल वाहन, बड़े जेनरेटर सेट चल रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण कांच उद्योग की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं, परंतु प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रशासन व संबंधित विभाग सख्ती से कार्रवाई नहीं कर पा रहे।
समस्या - पांच
एक दशक से अटका है ट्रांसपोर्ट नगर
फिरोजाबाद की जनता को सालों से ट्रांसपोर्ट नगर योजना के धरातल पर उतरने का इंतजार है, परंतु बजट के अभाव में विकास प्राधिकरण योजना को मूर्तरूप नहीं दे सका। विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2008 में ट्रांसपोर्ट नगर योजना का प्रस्ताव तैयार किया। किसानों द्वारा चार गुना मुआवजा की मांग पर प्राधिकरण ने प्रस्ताव वापस ले लिया।
समस्या - छह
बदहाल पार्क, कैसे हो पर्यावरण संरक्षण
नगर निगम बनने के बाद भी शहर के पार्क बदहाल पड़े हैं। पार्कों में न हरे-भरे पेड़ पौधे लगे हैं और नहीं टहलने को घास। सुहागनगर, गणेश नगर, विभव नगर, बोधाश्रम, रसूलपुर सहित अन्य पार्क देखभाल के अभाव में पूरी तरह बदहाल हैं।
समस्या - सात
चिकित्सकों की कमी से सेहत नासाज
स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की कमी लंबे समय से है। अधिकांश पद खाली हैं, इससे स्वास्थ्य केंद्रों पर सही से इलाज नहीं मिल पाता है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सक नहीं आना चाहते हैं। कुल चिकित्सकों के 90 पद में से 46 ही भरे हैं। पूरे जिल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ है।
समस्या - आठ
नहीं धुला बालश्रम का दाग
तमाम कोशिशों के बाद भी यहां से बालश्रम का दाग धुला नहीं। शहर व आसपास के गांवों के 4550 परिवारों के सर्वे में 8781 बालश्रमिक काम करने को विवश हैं। 4492 बालक व 4289 बालिकाएं हैं। 7572 खतरनाक व 1209 सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। 3887 बालश्रमिक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक स्कूल का मुंह नहीं देखा।
समस्या - नौ
थम नहीं रहा आधी आबादी पर जुल्म
आधी आबादी पर पूरा जुल्म
छात्राओं के साथ छेड़ख़ानी, दुष्कर्म जैसी वारदातें आए दिन सामने आ रहीं है। पुलिस का तर्क होता है कि विपक्षी को फंसाने को कई मामलों में इन्हें हथियार बनाते हैं। इसमें सुधार को एसएसपी ने थाने में आने वाले हर फरियादी को पीली पर्ची देने के आदेश दिए, लेकिन इसका पालन होता ही दिखाई नहीं देता।
समस्या - दस
नहीं भरे सड़कों के जख्म
शहर से लेकर गांव तक की सड़कों की हालत दशकों बाद भी खराब है। पीडब्ल्यूडी ने ग्रामीण अंचल की 800 सड़कों को दीपावली से पहले गड्ढामुक्त करने का फैसला लिया। 200 किलोमीटर सड़कों की हालत अधिक खराब होने के कारण उनके नवीनीकरण का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन दावे पहले भी फेल होते दिखे हैं।