फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्रामीणों को याद नहीं कब सगामई गांव आए थे सांसद

विज्ञापन
ग्रामीणों को याद नहीं कब सगामई गांव आए थे सांसद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मैनपुरी। सांसद तेज प्रताप यादव के गोद लिए गांव की तस्वीर आप देख ही चुके हैं। यहां के ग्रामीण याद करने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन उन्हें याद ही नहीं आता कि सांसद गांव कब आए थे।
विज्ञापन



ग्रामीणों का कहना है कि एक बार भी सांसद गांव नहीं आए। वहीं, अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी गांव से दूरी बनाए रखी है। तीन हजार की आबादी वाला सगामई गांव विकास के लिए मोहताज है।


सांसद ने गांव को गोद लिया, लेकिन विकास पर ध्यान नहीं दिया। सांसद के ध्यान न देने से अफसर भी बेफ्रिक रहे और गांव नहीं गए। गांव में चारों ओर समस्याएं ही समस्याएं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



गोद लिए जाने के बाद भी गांव का विकास न कराए जाने से ग्रामीण आहत हैं। ग्रामीण कहते हैं कि गांव सांसद द्वारा गोद नहीं लिया जाता तो कष्ट नहीं होता।


क्योंकि वह विकास के सपने नहीं देखते। ग्रामीण यह भी बताते हैं कि सांसद ने गांव में न तो कोई चौपाल लगाई और न ही गांव आकर किसी का सुख-दुख ही बांटा।

सांसद जी ने गांव गोद तो लिया, लेकिन दर्शन आज तक नहीं दिए। विकास के लिए भी कुछ खास नहीं किया।
रतीराम


याद तो तब हो जब सांसद जी गांव आए हों। गांव को गोद लेने के बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
जितेंद्र कुमार


गांव में सड़क, नाली, पानी जैसी मूलभूत समस्याएं हैं। अधिकारी और नेता ध्यान देते तो समस्याएं दूर हो जातीं।
कृष्णा देवी


गांव ते सिर्फ नाम का गोद लिया है, काम तो कुछ हुआ ही नहीं। अगर जरा सा ध्यान दिया गया होता तो समस्याएं दूर हो जातीं।
प्रेमदास
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें