एटा। जिले में विलुप्त ईसन नदी को जीवंत करने की राह में रोड़ा अटक गया है। निचली गंग नहर के अधिशासी अभियंता ने प्रशासन को पत्र लिखकर नदी को पानी देने में असमर्थता जताई है। गंग नहर प्रशासन का कहना है ईसन नदी को पानी देने से गंग नहर को खतरा है। उन्होंने नहर की क्षमता में गिरावट आने की बात कही है।
जिले में विलुप्त ईसन नदी का जीर्णोद्धार करने के लिए प्रशासन ने कवायद की थी। 10 अप्रैल को आहूत बैठक में डीएम अमित किशोर ने अधिशासी अभियंता निचली गंग नहर के सामने ईसन नदी के साइफन में नए गेट का निर्माण कराकर 200 क्यूसेक पानी देने का प्रस्ताव रखा था। मामले में जांच के बाद अधिशासी अभियंता निचली गंग नहर ने पत्र लिखकर डीएम से पानी देने में असमर्थता जताई। उन्होंने पत्र में कहा कि 1878 में निर्मित निचली गंग नहर में सीसी लाइनिंग का काम चल रहा है।
यह नहर कासगंज, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरेया, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, कौशाम्बी जिले के किसानों को रबी और खरीफ में सिंचाई के लिए किसानों को पानी उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा है कि पूरे वर्ष संचालित होने वाली नहर कई वर्षों से लगातार चलने से कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके चलते नहर को 8500 क्यूसेक की पूर्ण क्षमता से चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस कारण मौजूदा दौर में केवल खरीफ फसली में ही सिंचाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि नहर के क्षतिग्रस्त होने से केवल 12 जिलों को पानी दिया जा सकता है। यदि नहर को पूर्ण क्षमता से चलाया जाता है, तो इससे खतरे की आशंका है। इसके साथ ही राजकीय संपत्ति और जनहानि भी हो सकती है। अधिशासी अभियंता निचली गंग नहर नरौरा खंड ने डीएम को लिखे पत्र में ईसन नदी को नहर से पानी देने के लिए मना कर दिया है। अब प्रशासन को निजी तौर पर नदी को जीवंत करने के प्रयास करने होंगे।