513 साल पहले तीर्थ सूकर क्षेत्र आए थे महाप्रभु बल्लभाचार्य
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सोरों (कासगंज)। पौराणिक तीर्थनगरी में महाप्रभु बल्लभचार्य ने 513 वर्ष पूर्व यहां भ्रमण कर 23वीं बैठक की स्थापना की थी। पौराणिक काल से इस बैठक में बल्लभ संप्रदाय के अनुयायी महाप्रभु बल्लभाचार्य के चरण चिन्हों के दर्शन के लिए आते हैं। उनके भाई बिठ्ठलनाथ गोसाई ने पावन नगरी में भक्तों को भागवत कथा सुना कर उनकी 20वीं बैठक थी। बिठ्ठलनाथ के पुत्र का तीर्थनगरी में आगमन हुआ तो उन्होंने गोकुलपुर गांव बसाया। जिसे आज होडलपुर के नाम से जाना जाता है।
चैतन्य चरितामृत नामक प्रसिद्ध ग्रंथ में उनके सोरों आगमन के बारे में बताया गया है कि महाप्रभु आदि तीर्थ सूकर क्षेत्र में विक्रम संवत1573 में आए थे। उन्होंने आदि तीर्थ में भगवान वराह के दर्शन कर भागीरथी गंगा में स्नानकर अपनी 23वीं बैठक स्थापित की थी। वहीं पर उनके अनुयायियों ने बैठक बना कर उनके चरण चिंह दर्शन के लिए स्थापित किए हैं। पुराविद डा.नरेश बंसल ने बताया कि महाप्रभु की पावन स्मृति में देश के दूरस्थ इलाकों से बड़ी संख्या में विद्वान आदि तीर्थ में पहुंचते हैं। यहां निरंतर संकीर्तन होता है।
बताया जाता है कि आदि तीर्थ के कृष्णदास मेनन को महाप्रभु ने भगवान कृष्ण के रूप में अलौकिक दर्शन दिए। महाप्रभु के पुत्र बिठ्ठलनाथ गोसाई ने यहां भागवत कथा भक्तों को सुनाई और 20वीं बैठक की। उन्होंने आदि तीर्थ के भक्तों को प्रभुदर्शन दिए। बिठ्ठलनाथ के पुत्र गोकुलनाथ संवत 1678 में तीर्थनगरी आए। वह मूलरूप से मथुरा के गोकुल गांव में रहते थे, लेकिन मुगल सम्राट जहांगीर के अत्याचारों के बाद वे अपनी गाय, घोड़ेे और ग्रामीणों के साथ आदि तीर्थ पहुंचे। यहां आकर उन्होंने गोकुलपुर गांव बसाया। इसे ही छोटा गोकुल कहा गया। बाद में राजा होडल के नाम से गांव का नाम होडलपुर पड़ा। आदि तीर्थ बल्लभ संप्रदाय के भक्तों का भी प्रिय है।