मैनपुरी। जिला कारागार में बैरक बनाने का काम धीमी गति से चल रहा है। एक वर्ष पूर्व शुरू हुआ कार्य अभी महज 30 फीसदी ही हो सका है। जबकि बंदियों की संख्या 1100 से ज्यादा है। बैरक कम होने से इन्हें रखने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। आलम यह है कि एक बैरक में कई बंदी रखे गए हैं।
जिला कारागार में पुरुष व महिला बंदियों के रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इस समस्या को देखते हुए करीब एक वर्ष पूर्व शासन स्तर पर 10 नई बैरक बनाए जाने की मंजूरी मिली थी। इसके लिए धनराशि भी उपलब्ध करा दी गई थी। पर, अभी तक बैरकों के निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका है।
कई बंदी अभी भी एक ही बैरक में रहने को मजबूर हैं। दो मंजिला बैरक की एक मंजिल का निर्माण कार्य तो पूरा कर लिया गया है मगर अभी दूसरी मंजिल का कार्य शुरू ही हुआ है। पहली मंजिल का कार्य भले ही पूरा हो गया हो मगर उसमें अभी बंदी रखे जाने को लेकर व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो सकीं हैं। जिस वजह से बंदियों के हालात में न तो कोई सुधार हुआ है न ही उन्हें कोई राहत मिल सकी है।
दीवानी में पेशी पर आने वाले बंदी भी कई बार बैरक एवं जेल की अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर आवाज उठा चुके हैं। कई बार तो बंदी पेशी पर जाने तक से इंकार कर चुके हैं। उन्हें समस्या को दूर किए जाने का सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। वहीं दीवानी में पेशी पर आने वाली महिला बंदियों के लिए हवालात की व्यवस्था न होने से उन्हेें वाहन में ही घंटाें बैठकर पेशी के लिए इंतजार करना पड़ता है।
जेलर कुश कुमार सिंह बैरक निर्माण का काम करीब 30 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। जल्द ही शेष काम भी पूरा करा लिया जाएगा। इसके बाद बंदियों को नई बैरकों में शिफ्ट किया जाएगा।