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पशु आश्रय स्थलों में गर्मी में तड़प रहे गोवंश, एक माह में छह की मौत

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एटा। न छांव का इंतजाम, न पानी का, खाने को भूसा नहीं चारा नहीं। इन हालात में गर्मी में तड़प रहे हैं पशु आश्रय स्थल पर रहने वाले गोवंश। सरकार ने गोवंशों को पशु आश्रय स्थल पहुंचाने का फरमान तो सुना दिया लेकिन पशु आश्रय स्थल की देखरेख करने वालों के सामने उनके खाने पीने और रखने की व्यवस्था करने का कोई इंतजाम नहीं है।
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प्रशासनिक आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जनपद में कुल 13 पशु आश्रय स्थल और तीन कान्हा गौशाला संचालित हैं। पशु आश्रय स्थलों पर करीब 1560 गोवंश मौजूद हैं। इसके अलावा अन्य गौशाला जो अन्य संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही हैं। गोशाला में रहने वाले गोवंशों की हालत इतनी खराब है कि शहर की एक गोशाला में एक माह में छह गोवंश बीमार होकर मर गए। इसकी जानकारी पशु पालन विभाग को अब तक नहीं हैं। इसके अलावा अन्य आश्रय स्थलों पर भी करीब आठ से दस गोवंश की जान जा चुकी है, लेकिन विभागीय अधिकारियों तक इसकी जानकारी नहीं पहुंच रहीं है। गोवंश की जान सिर्फ इसलिए जा रही है क्योंकि आश्रय स्थलों और गोशालाओं में इनकी रहने खाने का ठीक इंतजाम नहीं हैं।
मंडी के आढ़ती करते हैं व्यवस्था
मंडी समिति के पास स्थित गोशाला में अब 360 गोवंश रह गए हैं। जबकि पिछले महीने 374 गोवंश मौजूद थे। इनमें से छह बीमारी के चलते मर गए। जबकि आठ बछड़ों को किसान ले गए। यहां मौजूद कर्मी ने बताया कि पिछले दिनों नगर पालिका और पशु पालन विभाग के लोग करीब 40 पशु यहां छोड़ गए हैं। लेकिन व्यवस्था के नाम पर कोई संसाधन मुहैया नहीं कराए। बताया कि कई वर्षों से शासन की ओर से गोशाला को कोई अनुदान भी नहीं मिला। गोशाला की व्यवस्था मंडी के आढ़ती व शहर के दानदाता चला रहे हैं।
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खाली पड़ी नाद, पानी के लिए हैंडपंप का सहारा
मलावन स्थित आश्रय स्थल पर गोवंशों के लिए छाया की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। आस पास में कोई पेड़ भी नही लगा है। जहां दिन के समय यह गोवंश रह सकें। इतना ही नहीं यहां पानी के लिए मात्र एक नल का ही सहारा है। यहां गोवंशों के लिए खाने की भी कोई खास व्यवस्था नहीं है। नाद खाली पड़ी हुई है। उसमें भूसे का एक दाना दिखाई नहीं पड़ता है। ऐसे में करीब 90 गोवंश को खाने के लिए आस-पास खाली पड़े खेतों का ही सहारा है।
खेतों पर चराते, तालाब का पानी पिलाते
गोवंश आश्रय स्थल की देखभाल करने वाले कन्हैयालाल का कहना है कि गोवंशों को दिन के समय खेतों में चराया जाता है पास ही बने तालाब में पानी पीते हैं। गोवंशों के खाने की व्यवस्था पर किसी भी तरह की जानकारी नहीं है।
तीन ब्लाकों में नहीं है पशु आश्रय स्थल
जनपद के तीन ब्लाक निधौलीकलां, जलेसर और मारहरा में अब तक एक भी पशु आश्रय स्थल नहीं है। यहां पशु आश्रय स्थल बनाने के लिए प्रयास किए गए लेकिन अब तक इसकी कोई समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। इसके चलते यहां पकड़े जाने वाले पशु भी जिले में संचालित अन्य आश्रय स्थलों पर ही भेजे जाते हैं।
तकनीकी कमेटी ने किया गो संरक्षण केंद्र का निरीक्षण
एटा। वृहद गो संरक्षण केंद्र वाहिद बीबीपुर में चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए जिलाधिकारी आईपी पांडेय की ओर से तकनीकी कमेटी का गठन किया गया। इसमें अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड, सहायक अभियंता डीआरडीए को आरईएस और सीवीओ के साथ जोड़ा गया। इन अधिकारियों ने बुधवार को गो संरक्षण केन्द्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण में गुणवत्ता की जांच की गई। लेकिन कमेटी निर्माण कार्य से संतुष्ट दिखी।
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आंकड़ों पर नजर
13 गोवंश आश्रय स्थल है जनपद में
1560 गोवंश पशु आश्रय स्थल में हैं मौजूद
03 ब्लाकों ने नहीं है एक भी पशु आश्रय स्थल
02 मॉडल पशु आश्रय स्थल बनाए जाने के दिए गए निर्देश
03 कान्हा गोशाला है जिले में संचालित
06 गोवंश की हो चुकी एक माह में मौत
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