मैनपुरी। मौसम में परिवर्तन सांस के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। दो दिन में सांस से पीड़ित चार मरीजों की मौत हो चुकी है। अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं जिला अस्पताल में सांस के मरीजों के लिए उपचार की बेहतर व्यवस्था तक नहीं है।
जिले में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। सोमवार को जिला अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही। सांस की दिक्कत से छह मरीजों को भर्ती कराया गया। नगर के मोहल्ला राजीव गांधी नगर निवासी माला देवी 55 वर्ष पत्नी रमेश चंद्र को परिजनों ने रविवार की रात सांस की दिक्कत होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था।
यहां उपचार के दौरान माला देवी की मौत हो गई। वहीं थाना घिरोर क्षेत्र के गांव शाहजहांपुर निवासी 65 वर्षीय रमेश चंद्र को परिजनों ने सांस की दिक्कत होने पर सोमवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। चेस्ट फिजीशियन डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि दोनों ही मरीजों को काफी देर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनकी उपचार की दौरान मौत हुई है।
सांस के मरीजों के उपचार के लिए जिला अस्पताल में चेस्ट फिजीशियन तो हैं, लेकिन मशीनें नहीं हैं। ऐसे में मरीज को केवल प्राथमिक उपचार के साथ ही रेफर कर दिया जाता है। गंभीर मरीज उच्च अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। चेस्ट फिजीशियन डॉ. धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि अस्पताल में सांस के मरीजों के लिए पल्मोनरी टेस्ट मशीन जरूरी है। इसके अभाव में मरीज की समय से जांच नहीं हो पाती है।
जिला अस्पताल में सांस के मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं तक नहीं हैं। अस्थलीन टेबलेट और अस्थलीन इन्हेलर भी बाहर से मंगाना पड़ रहा है। हालांकि सीएमएस डॉ. आरके सागर का कहना है कि प्राथमिक उपचार के लिए जो दवाइयां जरूरी हैं, वह अस्पताल में उपलब्ध हैं।
चेस्ट फिजीशियन डॉ. जेजे राम का कहना है कि आतिशबाजी सांस के मरीजों के लिए बहुत ही खतरनाक है। सांस के मरीजों को ऐसी जगह से दूरी बनाके रखनी होगी, जहां पटाखे और आतिशबाजी का अधिक प्रयोग होता है। उन्होंने दीवाली पर आतिशबाजी सीमित रूप में ही चालने की लोगों से अपील की। उनका कहना है कि आपकी खुशी सांस के मरीजों के जीवन को संकट में डाल सकती है।