मथुरा। शिक्षक भर्ती घोटाले में बीएसए, एबीएसए के साथ मुख्यालय के कुछ अफसर और कर्मचारी भी जिम्मेदार हैं। एसटीएफ ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि मथुरा से फर्जी शिक्षकों को लेकर लगातार मुख्यालय पर शिकायतें पहुंचती रहीं लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। प्रधानाध्यापकों पर भी फर्जी शिक्षकों को ज्वाइन कराने के लिए इस गठजोड़ ने दबाव बनाया था।
मथुरा में 18 जून को 108 फर्जी शिक्षकों की भर्ती का बड़ा घोटाला सामने आया था। एसटीएफ ने इसका खुलासा किया था। बीएसए के बाबू महेश शर्मा समेत 13 लोगों को जेल भेजा गया था। इनमें नौ फर्जी शिक्षक भी थे। इन सभी को फर्जी ज्वाइनिंग लेटर जारी करके तैनाती दी गई थी। एसटीएफ ने 23 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस बड़े घोटाले की पूरी रिपोर्ट एसटीएफ ने मुख्यालय को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भर्ती घोटाला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था। इसमें केवल बाबू ही नहीं बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं।
बीएसए और एबीएसए तो जिम्मेदार हैं ही शिक्षा विभाग के लखनऊ स्तर के अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएसए ने 80 प्रधानाध्यापकों को सस्पेंड भी किया है। इन सभी प्रधानाध्यापकों का कहना था कि उन्हें तो अफसरों ने कहा था ज्वाइन कराने के लिए। अब अधिकारी का आदेश कैसे टाल सकते हैं।
कई फर्जी शिक्षक तो ऐसे भी पहुंचे जिनकी बड़ी सियासी पहुंच थी। इस रैकेट से जुड़े कुछ लोगों के अच्छे सियासी रिश्ते भी पता चले हैं। बीएसए के बाबू महेश शर्मा से भी इनकी दोस्ती बताई जा रही है। एसटीएफ के एसपी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब पुलिस विवेचना कर रही है।
एसटीएफ के अफसरों ने एसएसपी से की मुलाकात
एसटीएफ के अफसरों ने मथुरा पहुंचकर एसएसपी बबलू कुमार से मुलाकात की और शिक्षक भर्ती की जांच पर चर्चा की। अब तक की पूरी कार्रवाई से पुलिस कप्तान को अवगत कराया। एसटीएफ के एसपी आलोक प्रियदर्शी के साथ मथुरा पहुंची थी टीम। इन लोगों ने एसएसपी बबलू कुमार से मिलकर शिक्षक भर्ती घोटाले के बारे में सिलसिलेवार बताया।