फिरोजाबाद। सुहागनगरी में करोड़ों का निवेश करने वाली कांच इकाईयां गैस मिलने का तीन से इंतजार कर रही हैं, लेकिन टीटीजेड द्वारा लगातार उनकी अनदेखी की जा रही है। वहीं पहले से संचालित इकाइयों के गैस कोटा लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। इससे प्रतीक्षारत इकाई संचालकों की बेचैनी बढ़ रही है।
टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण व बाहरी औद्योगिक संगठनों द्वारा प्रदूषण को लेकर शिकायतों पर मंडलायुक्त ने संज्ञान लिया था। मंडलायुक्त ने जनवरी 2015 से टीटीजेड में नए उद्योगों की स्थापना एवं क्षमता विस्तार को बैन कर दिया। टीटीजेड के फरमान से करोड़ों का निवेश करने वाली 43 इकाईयों को तीन साल में अभी तक गैस नहीं मिल सकी है। उद्यमी लगातार टीटीजेड की रोक हटवाने के लिए दिल्ली से लखनऊ तक दौड़ रहे हैं, लेकिन अभी तक राहत की उम्मीद नहीं है।
इधर सुहागनगरी में जो इकाईयां पहले से संचालित हैं, वह कांच उत्पादन बढ़ाने को लगातार प्रयासरत हैं। टीटीजेड द्वारा सुनवाई न किए जाने से अब तक कई इकाइयों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट ने टीटीजेड अथॉरिटी को नियमानुसार मामले के निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब तक हाईलाइट ग्लास, मीरा ग्लास इंडस्ट्रीज व सीए ग्लास वर्क्स का गैस कोटा पहले ही बढ़ चुका है। हाल ही में इंडस्ट्रियल एंड बिल्डिंग ग्लास इंडस्ट्रीज का कोटा भी बढ़ गया। वर्तमान में कांच इकाई को 22 हजार एससीएमडी गैस मिली हुई है, इकाई द्वारा 30 एससीएमडी गैस की डिमांड की जा रही है।
टीटीजेड अथॉरिटी ने इंडस्ट्रियल एंड बिल्डिंग ग्लास का कोटा 22 हजार से बढ़ाकर 25 हजार एससीएमडी इस शर्त के साथ किया है कि भट्टी का साइज नहीं बढ़ा सकेंगे। हाईकोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को हरिओम ग्लास इंडस्ट्रीज की टीटीजेड में सुनवाई होनी है।