मथुरा। पीडब्लूडी से सेवानिवृत्त अवर अभियंता आरसी भाटिया शहर के ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके पास 10 हजार से ज्यादा डाक टिकटों का संग्रह है। इसमें 400 से ज्यादा डाक टिकट तो स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए हैं। इन्हें डाक टिकटों का बैंक भी कहा जा सकता है।
80 वर्षीय आरसी भाटिया को डाक टिकट संग्रह करने की रुचि 1947 में पैदा हुई थी। तब वे काफी छोटे थे। आजादी के बाद पहला डाक टिकट राष्ट्रीय ध्वज पर जारी हुआ था। यह डाक टिकट उन्हें उनके पिता ने लाकर दिया था। इसी के साथ शुरू हुआ उनका डाक टिकट संग्रह का दौर 1997 तक निरंतर 50 साल चला। इसमें आजादी से जुड़े लोगों के टिकटों का संग्रह खास रहा, जिसमें झांसी की रानी, चंद्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह, बहादुर शाह जफर पर जारी डाक टिकट भी शामिल हैं।
आरसी भाटिया बताते हैं कि कई बार तो डाक टिकटों को लेने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी। प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद पर उनकी मौजूदगी में 1962 में डाक टिकट जारी हुआ, लेकिन उन्हें इस समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करने से रोक दिया गया। बहुत मशक्कत के बाद ही वह समारोह में शामिल हुए और टिकट प्राप्त किया।
लग चुकी है डाक टिकटों की प्रदर्शनी
मथुरा। आरसी भाटिया द्वारा संग्रहित डाक टिकटों की प्रदर्शनी सबसे पहले राजकीय संग्रहालय मथुरा में लगी थी। इसके बाद इलाहाबाद, झांसी, बैंगलोर सहित ताज महोत्सव में भी लगाया गया। 80 साल के भाटिया इस संग्रह को कहीं सुरक्षित स्थान न मिलने से ज्यादा चिंतित हैं।
लठामार होली का भी है डाक टिकट
मथुरा। आरसी भाटिया के संग्रह में मथुरा से जुड़े कई डाक टिकट भी मौजूद हैं। इसमें लठामार होली पर जारी डाक टिकट के साथ स्वामी हरिदास, राजा महेंद्र प्रताप और मथुरा संग्रहालय पर जारी डाक टिकट भी शामिल है।