शहर का विकास अटका हुआ है और नगर पालिका कर्जदार बनती जा रही है। ठेकेदार अपनी जेब से शहर में निर्माण कार्य करा रहे हैं। जबकि बिल पेंडिंग पड़े हुए हैं। पालिका अब तक साढ़े पांच करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी हुई है। जिसके चलते न तो कोई नए टेंडर हो रहे और न ही कोई योजना बन पा रही है। इधर, पालिका के भुगतान न मिलने से ठेकेदार मनमानी पर उतारू हैं।
शहर में रेलवे रोड, ठंडी सड़क, कैलाशगंज रोड समेत तमाम सड़कें गुणवत्ता के अभाव में बह चुकी हैं और पालिका बजट का रोना रो रही है। चार साल से ठेकेदारों के पेमेंट नहीं हुए हैं। पालिका पर ठेकेदारों का ही साढ़े पांच करोड़ रुपया बकाया है। जिसके चलते ठेकेदार मनमाने तरीके से काम करने पर उतारू हैं।
पालिका के कर्मचारी ने बताया कि जनवरी माह में पालिका को 1,85,41,318 रुपये की आय हुई, जबकि खर्च 1,13,54,576 का हुआ है। ऐसे में पालिका फायदे में तो है, लेकिन ठेकेदारों का भुगतान करने में फेल है। ठेकेदार कहते हैं कि पालिका से भुगतान पाने के लिए चक्कर काटकर थक गए हैं, लेकिन हर बार बजट नहीं होने का रोना रो दिया जाता है।
पालिका के जनप्रतिनिधियों ने मनमाने तरीके से शासन से मिली धनराशि को खर्च किया। जिस मद में कार्य कराने के लिए बजट मिला, उससे कार्य नहीं कराया गया। बस कागजों पर काम दिखाकर बजट निकाल लिया।
पिछले सालों के लंबित पड़े भुगतानों को निपटाया जा रहा है। निर्माण कार्यों की जांच हो रही है। इसके बाद भुगतान किया जाएगा। कुछ निर्माण कार्य अधूरे भी हैं, जिनको पूरा कराया जा रहा है।
रामदत्त राम, प्रभारी ईओ और एएसडीएम
कमीशन लेकर बैठे हैं पालिका के जिम्मेदार
ठेकेदारों को काम दिलवाने के एवज में लिया जाने वाला कमीशन पालिका के जिम्मेदारों ने पहले ही वसूल कर लिया है। ऊपर की पहली सीट से लेकर नीचे तक हर कर्मचारी ने भुगतान होने से पहले ही कमीशन ले लिया।
आंकड़ों पर नजर
02 वर्ष से नहीं हुआ ठेकेदारों का भुगतान
5.50 करोड़ रुपये ठेकेदारों के है बकाया
34 ठेकेदार नगर पालिका में कर रहे हैं कार्य
1.85 करोड़ है नगर पालिका की हर माह की आय
1.13 करोड़ है नगर पालिका का हर माह का खर्च