आगरा। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से संबंधित चोरी गए जमीनों के दस्तावेजों का रिकार्ड अब तक नहीं मिल पाया है। इसके लिए तहसील अधिकारियों को लंबी कवायद करनी पड़ेगी। अधिग्रहित की गई जमीनों के मूल दस्तावेज उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के पास हैं। जोकि जमीनों के बैनामा होने के साथ ही उन्हें दे दिए गए थे।
पिछले महीने की शुरुआत में एत्मादपुर मदरा के लेखपाल ने अपनी बाइक चोरी की शिकायत थाना सिकंदरा में दर्ज कराई थी। इसमें उसने कुछ दस्तावेज भी चोरी चले जाने का हवाला दिया था। ये दस्तावेज आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों से संबंधित थे। इस पर उपजिलाधिकारी सदर रजनीश मिश्रा ने तहसीलदार रजनीकांत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी थी।
जांच में लेखपाल की लापरवाही उजागर हुई। सरकारी दस्तावेजों को न संभालकर रखने के आरोप में उसे निलंबित भी कर दिया गया। मगर, चोरी गए दस्तावेजों का रिकार्ड तहसील को नहीं मिल पाया है। जमीनों के मूल कागजात यूपीडा के पास हैं। तहसीलदार रजनीकांत के अनुसार, चोरी गए दस्तावेजों का रिकार्ड राजस्व विभाग से निकलवाया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच में आई थी अड़चन
पिछले दिनों शासन ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का ब्योरा तलब किया था। शासन ने उन लोगों की सूची मांगी थी, जिन्होंने योजना शुरू होने से एक साल पहले एक्सप्रेसवे की जमीन या इसके आसपास की जमीन खरीदी थी। सदर तहसील में ऐसे 17 लोग थे, जिन्होंने एक्सप्रेसवे बनने से एक साल पहले यहां जमीन खरीदी थी। खतौनी चोरी हो जाने की वजह से इनका रिकार्ड रजिस्ट्री कार्यालय से निकलवाना पड़ा था।