पुनीत शर्मा (मथुरा)। प्रशासन और एलआईयू द्वारा गृह विभाग को भेजे गए सत्रह पत्र दबा दिए गए थे। सीबीआई की जांच में इसका खुलासा होने के बाद हड़कंप मचा है। इन पत्रों में कब्जाधारियों पर हथियार होने और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बनने का जिक्र किया गया था।
रामवृक्ष यादव स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह यात्रा लेकर मार्च 2014 में मथुरा आया था। वह दो दिन के सत्याग्रह के लिए जवाहरबाग में दाखिल हुआ और उसके बाद निकला ही नहीं। जब वह मथुरा आया था तब उसके साथ मुश्किल से 500 लोग थे लेकिन बाद में बढ़कर संख्या 2500 तक पहुंच गई थी।
जवाहरबाग में बिगड़ते हालातों को लेकर खुफिया एजेंसियों ने और प्रशासन ने लगातार शासन को पत्र भेजे। जिलाधिकारियों ने गृह विभाग को चिट्ठियां भेजी थीं। वैसे तो तमाम पत्राचार हुए लेकिन 17 पत्र ऐसे थे जिनमें जवाहरबाग में जमा कब्जाधारियों से कानून व्यवस्था को खतरा बताया गया था।
यह भी कहा गया था कि कब्जाधारियों के पास असलहे हो सकते हैं। हर बार अफसर गृह विभाग को पत्र भेजकर निर्देश मांगते रहे लेकिन कोई निर्देश नहीं मिला। लेकिन अब जब सीबीआई ने जांच शुरू की तो पता चला कि गृह विभाग में ही इन चिट्ठियों को दबाया जा रहा था। यह चिट्ठियां जिम्मेदार अफसरों तक पहुंच ही नहीं पा रही थीं। गृह विभाग के अधिकारियों से पूछताछ भी की गई है।
इनमें समीक्षा अधिकारी रजनीश कुमार और आरक्षी शेषमणि शामिल थे। अभी कुछ और लोग भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। अब इन लोगों ने जवाहरबाग को लेकर भेजी गईं चिट्ठियों को आगे बढ़ाने में इतना विलंब क्यों किया यह जांच का विषय है। बताया जाता है कि मथुरा के इन सत्रह पत्रों में जवाहरबाग के हालात को लेकर पूरा ब्यौरा दिया गया था।
कब्जाधारियों को हटाने का प्लान था कमजोर
मथुरा। कब्जाधारियों को हटाने के लिए प्रशासन ने जो प्लान बनाया था वह बेहद कमजोर था। सीबीआई मान रही है कि प्रशासन पूरी तैयारी से जवाहरबाग में जाता तो जनहानि न होती। आधी अधूरी तैयारी से फोर्स को जवाहरबाग भेज दिया था।
भीड़ को कंट्रोल करने के संसाधनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रबर बुलेट चलानी चाहिए थीं। पानी की बौछार करते। तैयारी न होने के कारण यह हालात पैदा हो गए थे।
डीएम-एसएसपी समेत कई का फंसना तय
मथुरा। सीबीआई की जांच में जिलाधिकारी, एसएसपी समेत कई अफसरों का फंसना तय माना जा रहा है।
इन सभी अफसरों की भी लापरवाही सामने आ रही है। सीबीआई ने माना है कि जब बगैर अनुमति के रामवृक्ष दाखिल हुआ था तो उसे तत्काल ही बाहर निकाल देना चाहिए था। लेकिन अधिकारी शासन के आदेश का इंतजार करते रहे।