ईद की पूर्व संध्या पर खरीदारी करते लोग।
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फिरोजाबाद। पवित्र रमजान माह में रोजा रखने के साथ शाम होते ही हर किसी को चांद के दिखाई देने का इंतजार था। रविवार को ईद का चांद दिखाई देते ही हर चेहरे पर खुशी छा गई।
मस्जिदों से ईद की सूचनाएं दी जा रहीं थी। लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दे रहे थे। बाजारों में खरीददारी करने हर कोई निकला। घरों पर महिलाओं ने ईद पर आने वाले मेहमानों के इश्तकवाल को पकवान बनाने शुरू कर दिए। ईदगाह में नमाज अदा करने के लिए जाने के लिए ड्रेस का चिह्नांकन शुरू कर दिया।
साप्ताहिक बंदी रविवार का दिन होने के कारण बाजारों में खरीदारी करने वालों की भीड़ थी। कोई घरेलू सामान खरीद रहा था तो कोई मेहमानों के स्वागत के लिए मिष्ठान, फलों की खरीदारी करने में जुटा था। ईदगाह के साथ प्रमुख मस्जिदों के निकट साफ सफाई का काम प्रारंभ कर दिया।
वहीं सदर बाजार स्थित जामा मस्जिद के इमाम और शहर मुफ्ती अब्दुल अलीम ईसा ने कहा कि ईद खुशियों का त्योहार हैं, आपस में खुशी से मनाएं।
फिरोजाबाद। इस्लामिक सेंटर सचिव आलम मुस्तफा याकूबी ने कहा इस्लाम मे दो खुशी के दिन हैं। दोनों बड़ी इबादत के बाद ही आते हैं। रमजान के बाद ईद व हज अदा करने के बाद बकरा ईद। इस खुशी में टूटे दिल वालों को जरूर शरीक करें। मोहम्मद साहब ने फरमाया ईद के दिन सुबह नहाना, अच्छे कपड़े पहनना, खुशबू लगाना, कुछ मीठा खाना, चाहे खजूर ही क्यों न हो। ईदगाह एवं मस्जिद एक रास्ते से जाना व दूसरे रास्ते वापस आना चाहिए। रास्ते में तकलीफदेह चीज को हटाएं, खुद तकलीफदेह न बनें तथा नमाज अदा करने को पाक-साफ कपड़ा साथ ले जाएं। इस दौरान खुतबा सुनना और इमाम साहब के साथ ही दुआ में शरीक होना चाहिए।